सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 320, कुल 418 में से
संदर्भ में पढ़ें३०४ : ज्योतिष-शिक्षा, तुतीय फलित खण्ड
अध्याय १५
भिन्न-भिन्न भावों में ग्रहों का फल
लग्न में प्रत्येक ग्रह का GS
१--लग्न में सूयं Š
वाल्यावस्या में रोगी, नेत्र से दुःखी, नीच सेवा अनुरक्त,- प्रारब्ध से गृहस्थ सुख से
हीन, विकल रूप होकर पुत्र पोत्रों से रहित, सर्वत्र भ्रमण करने वाला ( मान० ) ।
अल्प केश, काम करने में अधिक अकमंण्यता (आळसी), क्रोधी, प्रचंड, ऊँचा कद,
घमंडी, रूक्ष लोचन, दुबला देह, शूर, अशांत, निर्दय । लग्न में कके का सूयं--नेत्र मे
मोतिया बिद हो । मेष का- नेत्र रोगी । सिंह का--रतोंघ वाला । तुला का--गरीदः
सन्तान हानि. का दुःख (फलदीप) (जा० म०) ।
शूरमा, विलम्ब से काम करने वाला । मेष का--धनवान्, नेत्र रोगी । कर्क का--
टेढ़ी दृष्टि वाला । सिह का--रात्रि अंध । तुळा--अंघा, दरिद्री (zo जा०) ।
थोड़े पुत्र वाला, सुखी निदंय, अल्प भोजी, विकल नेत्र, रण का इच्छुक-सुशोरू,
नाटक करने वाला । मेष का-ज्ञानाचार में रत। सुन्दर नेत्र, यशस्वी, स्वतन्त्र । सिंह
का- रात्रि अंध, वीयंवान् । मीन--स्त्री जन से सेवित (जा० पारि०) ।
अति तीव्र, चंचळ आत्मा, काम में व्याकुल, नेत्र रोगी, पीड़ा युक्त अंग, रक्त वर्ण
की आकृति (लग्न-चं०) ।
दुबला, स्त्री-पुत्र होन । तुला कामान हानि, विना विचारे काम फरे ( खान० खा० ) ।
प्रचंड रूप वाला, विकराल नेत्र, रतोंध याला, फुली युक्त नेत्र, कठ में ग्रह वाळा,
छाल नेत्र रुधिर नेत्र ( जातक संग्रह ) ।
या सूर्य की दृष्टि हो--क्रोघी, शरीर में वात पित्त से पीड़ा, सिर में पत्थर आदि के
चोट से कष्ट, कंठ या गुदा में व्रण या तिळ, बालपन में अनेक पीड़ा दुःख होते हैं. (जा० सं?) ।
२-- ग्न में चन्द्र का फल
घन से सम्पन्न, सुख भोगी, बलवान्, सुन्दर देह । नीच का या पाप युक्त हो--
जड़ बुद्धि, अति दोन, घन से हीन (मान सा०) ।
चन्द्र वृद्धि में-दुढ़ शरीर, दीघं जीवी, निर्भय, शक्तिशाली, घनी । क्षीण चन्द्र हो . तो-फल उल्टा हो (फल दोप०) ।
कर्क, वृष, मेष का-चतुर, रूपवान्, घनवान्, भोगों में श्रेष्ठ, गुणों से रहित । अन्य
राशि का- उन्मत्त, नीच, बहरा, Tr, विकल देह (जातकाभ्रण) । जड़ बुद्धि, प्रसन्न, धनी, स्त्री का प्यारा, धर्मवान्, कृतज्ञ, (लग्न-चन्द्रिका) 2 चन्द्र मेष छून का--बहु पुत्र । वुष--धनी । कर्क-घनवान् । अन्य राशि का-- यूया, पागल, या मूख, अन्धा, नीच कर्म करने वाला (qo जा०) ।