सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंभिन्न-भिन्न भावों Š ग्रहों का फल : ३०५
पूर्ण चन्द्र" दीर्घायु, विद्वान् । क्षीण चन्द्र--वधिर, अंगहीन । पाप युक्त चन्द्र---
दुत और अल्पआयु । उच्च का--घनी, यशस्वी, बहुत रूपवान् (जा० पारि०) ।
धनवान्, रूपवान्, पुष्ट, कायं सिद्ध । नीच या शत्रु क्षेत्री या शत्रु दृढ हो तो-- विपरीत फळ (खान०) ।
पुर्ण चन्द्र--सुरूप, घनवान् तथा कोमल शरीर । क्षीण चन्द्र -मलिन और areq
पराक्रमी 1 मेष, वृष, ककं का चन्द्र--रूपवान, घनी । शेष राशियों का--जड़ता ध्याधि
दरिद्रता हो ।
चन्द्र हो या चन्द्र को पूर्ण दृष्टि हो--सिर में पीड़ा वात वाघा, शीतता, गौरवर्णता
हो, स्वास कास पीड़ा, शरीर में वात भ्रम और घोडा आदि पशुओं से व राजा व चोरी
से हृदय में प्रहार हो (जा० सं०) ।
3— में मंगल का फल
बाल्य काल में पेट में तथा दाँतों में रोग हो, चुगल हो, कृशांग, पापों का जानने
चाळा, शरीर श्याम वणं, चपल चित्त, नोच सेवी, मलीग वस्त्रघारी, सुख रहित, पाप
शीळ (मान सागरी) ।
क्षत ( घायल ) शरीर, अल्पायु, अतिसाहसी, विमुख, विद्या रहित, घन सहित,
कुजन के आश्रित (फल दोप) ।
बुद्धि में भ्रम, घाव युक्त देह, हठ युक्त, आने जाने का काम करने वाला
(जातकाभरण) ।
कुरूप, रोगी, वन्यु रहित, असत्य भाषी, द्रव्य हीन, परस्त्रोगामी (छ० चं०) 1
शत्रु या स्वामी से झगड़ा करने वाला, भारी रोग से पीडित, वेकार या दुःखी,
विरोधी, दुर्वल, कुटुम्ब, स्त्रो पुत्र से वियोग ( खान० ) ।
क्रूर, साहसी, घूमने वाला, अत्यन्त चंचल, रोगी ( जा० पारि० ) ।
शरीर में प्रहार आदि के घाव हो ( वृ० जा० ) ।
गुदा में रोग, कलल नाभि में कंडू खुजली कुष्ट आदि से युक्त, मध्यदेश में अंग हीन।
लग्न में भोम हो या भौम की पूर्ण दृष्टि हो-लोह या पत्थर आदि से शरीर में पीड़ा,
अत्यंत क्रोध, बालपन में रक्त पोड़ा, तथा वात रक्त रोग, मस्तक, मध्य कंठ या गुह्य अंग
में ब्रण होता है ( जा० सं० )।
४-लग्न में बुध का फल
सुन्दर स्वरूप, अति प्रसन्न, बुद्धिमान्, लम्बा, पंडित, त्यागी, थोड़ा कोमल पवित्र
भोजी, सत्य वक्ता, अति सुख भागी, सदा परदेश वासी ( मान? )!
दोघें जीवी, मिष्ट भाषी, कुशाग्न बुद्धि, शास्त्राथं में विद्वान् ( फल० ) 1
रूपवान्, दयावान्, नीतिज्ञ, साहसी, दानी, पुत्र सुख प्राप्य ( खान? ) । शांत, नम्रता युक्त, उदार, आचार में तत्पर, घैयंवान्, विद्वान्, कलाओं का जानने
वाला, बहुत पुत्रों वाला ( जा? भरण ) 1 š
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