भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

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३०६ : ज्योतिष-शिक्षा, तुतीय फलित खण्ड

गीता का जानने वाला, निष्पाप, राजाओं में पुज्य, रूप ज्ञान और यश से युक्‍त

और प्रगलम ( लग्न चंद्रि० ) । विद्वान्‌ ( वृ० जा० ) । विद्या घन तप से युक्त

१ जा० पारि० ) ।

लग्न मे बुघ हो ओर कोई क्रूर ग्रह न हो-सुन्दर मति, चतुर तथा शाम्त, मेघावी गौर

प्रिय वचन भाषो, विद्वान्‌, अति दयालु ।

या बुघ की दृष्टि हो तो शरीर मिन्न वर्ण हो । मध्य भाग में स्त्री का सुख होवे,

शरीर में पीड़ा हो, क्रीड़ा आदि से दुःख उत्पन्न, शरीर में मसा व तिळ होवे । पेट में

गुल्म विकार 1 अल्प भोजी ( जा० सं० ) ।

५-लग्न में गुरु का फल

अनेक वस्त्रों से परिपूर्ण देह, सुवणं रत्न आदि बहु मूल्य घनों से एणं देखने में सुंदर,

राज कुलजनों का प्यारा ।

सुंदर भाग्यवान्‌, दीर्घजीवी संतान युक्त (फळ दो० )।

बड़ा आदमी, दिल खुश, ईश्वर भक्त, दाता, सर्दार, तेजस्वी ( खान० ) 1

विद्या युक्त, राजाओं का प्यारा, चतुर, निरंतर उदार, सुंदर शरीर ( जा० qo } 1

सुशील, प्रगल्म, रूपवान्‌, राजा का अभीष्ट, रोगहीन, ज्ञानी, सौम्य ( छ० चं० }।

पंडित ( qo जा० ) ।

बडो आयु, स्वच्छ ज्ञानी, घनी और ख्पवान्‌ ( जा ० पारि० ) 1

कविता करने वाळा, सुन्दर गोत वाला, प्रिय दर्शन और दानी, योगी, राजा से

सत्कार पाने वाळा, सुख सम्पन्न, घनी, देव पूजन में तत्पर ।

गोर वणं शरीर, शरीर में वात-कफ, वालपने में सुख. सम्पदा होती है, शत्रु के द्वारा

विषयादिक झूठी निन्दा से पीड़ा होवे । राज्य से अतुळ मान ओर अनेक घन प्राप्त होवे ।

लग्न में गुरु हो उस पर क्रूर दृष्टि होतो कोई व्यथा सो उत्पन्न होवे और जो जो

विघ्न उत्पन्न होते हैं तत्काळ नष्ट हो जाते हैं ( जा० संग्रह ) 1

६-लग्न में शुक्र का फल

कार्य करने में तत्पर, बड़ा पंडित, अनेक कलायों में कुशळ, गृह में शासक्त (मान०) ।

स्वस्थ और सुंदर शरीर, सुखो, दाघंजीवन ( फल० ) 1

तेजस्वी, बुद्धिमान्‌, घनो, रूपवान्‌ ( खान खा० ) ।

बहुत कलाओं में चतुर, सुन्दर वाणी, श्रेष्ठ स्त्रो से काम कला युक्त, राजा से सान

और घन ( जा० म० ) ।

सुशील, दयाबान्‌, सुन्दर, शुचि, विद्वान्‌, मनोज्ञ, कृतज्ञ ( छ० च०)

काम कला निपुण, सुखी ( qo जा० ) कामी, सुन्दर शरीर, स्त्र पुत्र युक्त, विद्वान्‌ ( जा० पारि० )

. बहुत बोलने वाला, अनेक प्रकार को कारीगरी से युक्त, विनय सम्पन्न, गान विद्या

मं तत्पर, काव्य शास्त्र में विलास वाला, धर्मात्मा ।