सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंभिन्न-भिन्न भावों में ग्रहों का फल : ३०७
लग्न में शुक्र हो या शुक्र की दृष्टि हो-गौरवणं शरीर वातपित्त युक्त, कमर, mie, -
सेट ओर गुह्य अंग इनमें ब्रण या तिल । कुत्ता व सींग वालों से और पवन से शरीर में
पीड़ा ( ज० सं० ) ।
७--लग्न में शनि का फल
घीरे-घीरे चलने वाला, ( अति दोघे सूत्री ) मन में. पीडित, महा अघम, मस्तक के
दा से 00 दुर्बळ अंग । शत्रुगृह, हो तो अपने कुटुम्बियों से विग्रह करने वाला हो मान० ) ।
उच्च या स्वगुही--राजा तुल्य या नगर का मुखिया ।
अन्य राशि में--दुःखी, बचपन से कंजूस, दरिद्री, मलिन, आलसी ( फल० ) ।
निवुद्धि, निर्बेळ शरीर, दुष्ट, कुरूप, दयाहीन, उल्टी अकल ( खान० ) ।
सदा रोगी, कुरूप, कृपण, कुशील, पाप बुद्धि, निश्चय मूख ( छ० चं० ) ।
तुळा, मकर, कुंभ का--देश नगर का स्वामी या राजा हो !
अन्य राशि का--दुःखो, रोग युक्त, दरिद्री ( जा० qo ) ।
१, २, ३, ४, ५, ६, ८ राशि का--नित्य दरिद्री, रोगी, अति कामी, मलिन 1
७, ८, १०, ११, १२, राशि का--राजा तुल्य, . ग्राम नगर का स्वामी या पंडित
हो, अंग सुस्वरूप हो ( qo जा० ) ।
दुर्नासिका, वृद्ध स्त्री वाला, रोगी, अंगहीन । उच्च का हो तो राजा के समान सुंदर
गुण हो ( जा० पारि० ) 1
खुजली से परिपूर्ण अंग, कफ प्रकृति ! न्यून अधिक अंग, कर्ण के मध्य भाग में
बात रोग ।
दानि हो या शनि की दृष्टि--छश देह, दुःखी, मूर्ख, कामी, शरीर भिन्न वर्ण का ।
लोहादि से शरीर में पीड़ा, निरंतर आत्मा की चिता ।
तुला, घनु, मीन, का शनि--राजा हो । दोष राशियों का हो तो अल्पायु हो।
<-हछग्न में. राहु फल
सदा रोगी, जुल का घारण करने वाला, बड़ा वकवादी, लाऊनेत्र, अतिपापी, चोरी
आदि बुरा काम करने वाला, साहस का काम करने में सदा, तत्पर, बडा चतुर (मान०) ।
अल्प जीवन, घनी, बली शरीर, ऊँचा अंग, सिर चेहरा आदि में रोग ( फल० )1
दुष्ट बुद्धि, खोटा स्वभाव, अपने सम्बन्धियों को ०गने वाला, शिर में रोग, वीये युक्त, .
झगड़े में जीत, रोगी ( जा० qo ) ।
दुःखी, आलसी, कुरूप, स्वार्थ परायण, रोगी, मुखं ( खान० ) । š
क्रूर स्वभाव, दयाघर्म हीन, शक्तिमान, रोगी । सिंह छनन में राहु-जल्द राज मोग
प्राप्त करता है ( जा० पारि० ) ।
इसका शनि समान फल है । सर्वांग में रोग वाला, विकल, कुरूप, बुरे केश, बुरे नख,
कुकर्मी, अधर्मी, परन्तु साहस के काम में बडा चतुर, लालनेत्र । राहु संचय. करता है ।
सिंह ककं मेष का राहु-सुवणं लाभ के लिये मंगळ कर्म करता है ( जा० सं० ) ।