भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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भिन्न-भिन्न भावों में ग्रहों का फल : ३०९

पूर्ण चंद्र--घन पुत्र सुख युक्त, नम्रता युक्त, श्रेष्ठ, क्षीण चन्द्र-_तोतला, घन रहित, थोड़ी बुद्धि । मघ्यवली चन्द्र हो तो बल के अनुसार घट बढ़ फल का अनुमान करना ( जा० भ० )।

. धनी, राजाओं से पूज्य, गुणी, शास्त्र प्रेमी, सौभाग्यवान्‌ मनुष्यों से प्रीत करने वाळा ( =° चं० ) । बड़ा कुटुम्ब वाला ( वृ० जा० )।

सुवर्ण सहित, चांदी तथा मणि रत्न घन बहुत हों कपूर चन्दन गंध आदि हों ( जा० सं० ) 1

धन में चन्द्र हो या चन्द्र को दृष्टि हो-धनी हो परन्तु उसकी बहिन और कन्या का

घन नाश हो ( जातक रत्न )। .

क्षीण चन्द्र हो ओर बुघ की दृष्टि हो-पूवं संचित घन का नाश और अन्न घन कौ

रोक करता 1 चन्द्रमा सन्निपात से उत्पन्न होने वाले शीत सम्बन्धी रोग देता है

( जा० सं०) ।

चन्द्र घनेश घन में--धर्म सम्बन्धी सूत्र प्रयोग व योग विद्या आवे, चपल हो, लाल

नेत्र केश भूरे हो ( प्राण यो० ) ।

३--धन भाव में मंगल का फल

घातु वाद करने वाला, परदेश वासो, कर्ज घन में प्रीत, जुआडी, सहन शील, खेती

के कार्य में समथं, पराक्रमी, दुर्बल देह, सदा सुख भोगी ( मान० ) ।

विमुख, विद्या रहित, घन रहित, दुष्ट जन के आश्रित ( फल० ) ।

घातु बाद (धातु का व्यापारी), खेती और घूमने में तत्पर, क्रोधी (जा० पारि०) ।

वेसुध, पुत्र, जन, स्त्रो सुख से हीन, युद्ध में शूर, चिता युक्त, कुरूप, शक्ति हीन,

निर्दय, दुष्ट बुद्धि, सदा क्रणी ( खान० ) ।

घन हीन, दृष्टजनों का आश्रय करने वाला, दुष्ट बुद्धि, कृपा रहित ( जा० भ० )।

घन हीन, क्रिया होन, दीघं सूत्री, सत्यवादी, पुत्रवान्‌ ( छ० चं० ) ।

दुष्ट अन्न बाजरा मड्वा आदि खाने वाला ( qo जा० ) ।

खेती करने वाला तथा बेचने वाला, भोग मोगने वाला, परदेश वासी, लाल रंग के

घनों से युक्त, वादी तथा बुद्धि नाश युक्त तथा जुआड़ी ( गगं मत ) ।

घन में मंगल हो या मंगल की दृष्टि हो--निरन्तर घन हानि, देह ओर नेत्र में पीड़ा,

स्त्री बंधु जनों के साथ कलह ( जातक रत्न ) ।

घन में मंगल--विष शस्त्र या रक्त प्रकोप से मरण ( जा० सं०.)।

४--धन भाव में वुध का फल

पिता भक्त, अति स्थिर, पाप से डरे, कोमल शरीर, कठोर रोम, छम्बें केश, अति

गोरा, सत्य वक्ता, विहार करने वाला, रत्नादिकों का भागी, सदा परदेश में रहने वाळा

( मान० ) ।