भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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३१२: ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

आदि मृत संतान वाली या गर्भपात आदि वाली हो ओर समीप में घर आदि वालों के

बालकों का मरण हो (जातक रत्न) । .

घन में शनि हो बुघ से दृष्ट हो--महाघनी हो (सारावली) ।

घन में शनि--उसके पास के घन को शत्रु व चोर ले लेवें । कठोर, क्रोधी, मूखं,

ईर्ष्यालु, दृष्ट विद्या जाने, तेल के तले पदार्थ प्रिय हों (प्रा० योग) ।

<— भाव में राहु का फल

चोरी करने वाला, बहुत दुःख भोगने वाला, मत्स्य मांस से घन सम्पादन करने

वाला, सदा नोचो के घर रहने वाला (मान०) ।

शंका युक्त, अस्पष्ट भाषण, मुख व चेहरे में रोग, नम्र हृदय, राजा द्वारा घन

प्राप्त, रोष युक्त, सुखी (फल०) ।

अप्रिय वाणी बोलने वाला, घन नाशक, दरिद्री, भ्रमणशील (जा० भ०) ।-

कर्मच्युत, मतलबी, दुःखो, परदेश में धन युक्त (खान०) 1 विरोधी (जा० पारि०) ।

मछली मांस से धन वाला तथा नख चर्म आदि का बेचने वाला, चोर कमं से जीविका (गर्ग) 1 बड़े दांत वाला या दंत रोगी (जा० सं०) ।

तामसी, दुर्भाषी, बिल्ली सरीखी आँखें (ध्रा० यो०) ।

९-धन भाव में केतु का फल

सदा व्यग्रता हो, दुष्ट राजा के द्वारा धनधान्य नाश, मुख में रोग हो, कुटुम्ब का

विरोधी, वार्तालाप में सत्कार पाने वाला, केतु स्वगृही हो, शुभ गृही हो तो अत्यन्त

आनन्ददायक होता है (मान०) ।

विद्या घन रहित, महो बोली, कुदृष्टि, पर अन्न भक्षण (फछ०) । घनधान्य का नाश करने वाला, कुटुम्ब का विरोधी, राजा से घन की चिन्ता करने

वाला, मुख में सदा रोग, अपनी दशा में या शुभ ग्रह को दशा में अत्यन्त सौख्य (जा० भ०) ।

राहु के समान फल ( खान० ), (प्रा० यो० ) । लोगों का अपराधी हो (जा० पारि०) ।

घन हानि, नीच का संग, दुष्टात्मा, सुख सौभाग्य से वर्जित (जा० सं०) ।

३-तीसरे भाव में प्रहों का फल

१-तीसरे भाव में सूयं का फल

भाई से रहित, प्रियजनों का हितकारी पुत्र स्त्री युक्त, घनवान्‌, धेर्यवान्‌, साहस शील, अनेक प्रकार के घन से विहार करने वाला उत्तम नागरिक, स्त्रियों से प्रेम करने वाळा (मान०) 1 बली, श्र, घनो, उदार, अपने बंधुओ से शत्रु भाव रखे ( फल० ) । नामवर, किफायती, निरोग, घनाढ्य, स्त्री सुख (खान०) ।

बुद्धिमान्‌, पराक्रमी (qo जा०) ।

` पराक्रमी, दुजन सेवित, विशेष धनी, दानो (जा० पारि०) ।