भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

पृष्ठ 329, कुल 418 में से

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पृष्ठ 329

भन्न-भिन्न भाव में ग्रहों का फल : ३१३

मिथ्या भाषी, घन वाहन युक्त, सत कर्मी, नोकरों से युक्त, थोडे भाई, अधिक

चलवान्‌ (जा० भ०) । प्रसिद्ध, रोग रहित, राजा, सुशील, दयालु (ल० चं०) 1

हानि दो डि ॥ व पराक्रम बा : युक्त हो परन्तु सूर्य को दशा में बड़ा भाई या बडी बहिन को

२-तीसरे भाव में चन्द्र का फल

हिंसक, बड़ा अभिमानी, कृपण, अल्प बुद्धि, बन्धु जनों का आश्रय करने वाला, दया

ओर भय से होन (जा०.भ०) । घन ओर विद्या से युक्त, कफ युक्त, कामुक, वंश में मुख्य (ल० चं०) |

प्राण घाती (वृ० जा०) ।

अल्प घनी, बन्धु प्रिय, सात्विक (जा० पारि०) ।

भाई हो, बली, शक्तिवान्‌, अति कृपण, कामुक (फल०) ।

चन्द्रमा यदि पापगृही हो तो--बहु भाषण करने वाला नहीं, मातृहता हो, शत्रु

सदृश । शुभग्रहो हो तो --सुख भोगी, घन युक्‍त, काव्य शास्त्र,का आनन्द पाने वाला

(सान०) । शत्रु का घात करे व क्र हो (प्रा० यो०) ३-तृतीय भाव में मंगल

भ्रातु हंता, दुबंछ शरीर, सुख का भागी । उच्च का हो तो- विलासी हो । नीच

या पाप गृही--धन सुख या मनुष्यों से होन, सम्पूर्ण पदार्थों के होते हुए भी टूटे wš

चर में वास (मान०) ।

अच्छे गुण युक्त, घनवान्‌, श्र, सुखी, माई होन, पराक्रमी (फल०) ।

घनी, सहज रोग, विपत्ति (खान०) 1

राजा की कृपा से उत्तम सुख, उदार, श्रेष्ठ परा»म, धनत्रान्‌, भ्रातृ सुख होन

{जा०म०) । बुद्धि और पराक्रम वाला (qo जा०) ।

प्रतापी, शील युक्त, लड़ाई में शुर, राजाओं से पूज्य, प्रसिद्ध (छ० चं०) ।

अपार पराक्रमी, शठ बुद्धि (जा० पारि०) ।

भाई या बहिन का घातक हो (प्रा० यो०) ।

४-तुतीय भाव में बुध का फल

साहसी, स्वजनों से युक्त, मलिनपन, सुख से होन, कल्याण हितार्थ शुभ कर्म का

हुच्छुक (मान०) ।

शुर, सावारण जीवन, अच्छे भाई हों, श्रम युक्त, निराश (फल०) ।

शीलवान्‌, दयालु, धनी, मित्र युक्त- स्त्री प्रिय, प्रसन्न चित्त (मान०) 1

मायावी, घूमने वाला, अत्यंत चंचल और दोन (जा० पारि०) 1

दुर्जन (वृ० जा०) (प्रा० यो०) ।

अच्छे बांघवों से पुज्य, घम को घ्वजा वाखा, यशस्वी, देव, गुरु पूजक (छ० चं०) ।

हठ से अपने सम्वस्थियो के साथ रहता ë । चित्त शुद्धि हीन, सौख्य qtaq, अपने

अन के अनुसार काम में चतुर (जा० मा०

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