सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 330, कुल 418 में से
संदर्भ में पढ़ें३ १४ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
५-तीसरे भाव Š गुरु का फल भाई बंदों के साथ गये हुए घन से युक्त, स्वाधीन घन हो, जब भी घन हानि से युक्त,
कंजूस, कुमार्गी (मान०) ।
अपमानित हो, कृपण हो , भाव दुष्ट पाप कर्ता हो (फल०) 1
लापरवाह, कटुवचन, कृपण, पराक्रमी, बहुजन पालक (खान०) ।
मित्रता रहित, कृपण, कृतघ्न, स्त्री पुरुषों की प्रीति रहित, मंदारिन रोग से वल हीन
(जा० भ०) ।
तेजस्वी, कर्म में निपुण, इद्धियजित्, मित्रों से सुख प्राप्त, तीथे की वार्ता में प्रसन्न
होने वाला (ल० चं०) । कृपण (qo जा०) (प्रा० यो०) ।
घन रहित, स्त्री से पराजित, पाप करने वाला (जा० पारि०) |
६-तृतोय भाव में शुक्र का फल _ i
मानजे से मोह करने वाला, नेत्र रोगी, घन सम्पन्न, प्रिय वचन, उत्तम वस्त्र धारण
कर्ता (मान०) । स्त्री रहित, दुःखो, गरीब, कृपण, अप्रिय (फल०) ।
नेक, जोरावर, आलसी, भ्रातृ सहित, घन रहित (खान०) 1
दुर्बल अंग, कृपण, दुष्टात्मा, घनहीन, काम देव से संतापित, संत पुरुषों को दुःख.
देने वाला, दुष्ट चेष्टा (जा० भ०) । $ र
घन घान्य और पुत्रों से युक्त, निरोगी, राजाओं में पूज्य, प्रतापी (छ० चं०) ।
कृपण (go जा०) (प्रा० यो०) ।
दोषयुक्त वचन, पापो, स्त्रो से पराजित (जा० पारि०) ।
७-तृतीय भाव में शनि का फ़ल
सहोदर भाइयों का नाशक, कुल में राजा के समान, पुत्र कलंक युक्त (मान०) ।
दान में उदार, स्त्री से सुखी, अकर्मण्य, भय युक्त (फल०) ।
सुर्य सरीखा फल, विद्वान्, पराक्रमी (qo जा०) 1
बलवान्, यशस्वी, प्रसन्न चित्त, सम्य, अनुचर वृन्द सहित (खान०) ।
राजा से माननीय, श्रेष्ठ वाहन युक्त, ग्राम पति, बड़ा वली, बहुत आदमियो का
पालन कर्ता (जा० qe) 1
प्रसर्न, गुण वत्सल, शत्रु मदन करने वाला, पूज्य, धनी और बीर. (ल० चं०) ।
अल्प भोजो, घन शील, वंश से युक्त, गुणवान् (जा० पारि०) ।
भाई बहिन का घातक (sro यो०) 1 ८-तुतीय भाव में राहु का फल
जातु नाश, सुख भोगी, घन, पुत्र, कलत, मित्र से युक्त, उच्च में हो तो--हाथी घोड़े नौकर आदि हों (मान०) ।
घमण्डो, भाइयों का विरोधो, दृढ़ इच्छा शक्ति वाला, दोघंजोवी, धनी (फल०) ।
: भाइयों का नाश, पशुओं का मृत्यु करने वाला, दरिद्र, मित्र सौख्य व बल युक्त, शत्र
5 अय नाशक, यश कल्याण व ऐश्वर्य को प्राप्त, सौख्य, विछास आदि का लाभ (जा० भ०);४