भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

पृष्ठ 331, कुल 418 में से

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भिन्न-भिन्न भावों में ग्रहों का फल : ३१५

बलवान्‌, यशस्वी, दाता, घनी (खान०) 1 अत्यन्त बली और धनी (जा० पारि०) ।

९-तृतीय भाव में केतु का फल

शत्रुओं का नाशक, विवाद (झगड़ा) करने वाला, घनवान्‌, अनेक भोग विलास युक्त,

ऐश्वयवान्‌, बड़ा तेजस्वी, मित्रों का नाश, सदा बाँह में पीड़ा, भय के कारण उद्वेग, चिता से व्याकुल (मान०) ।

दीर्घं जीवन, बल घन कोति युक्त, अपनी स्त्रो के साथ सुख पूर्वक रहे, अच्छा भोजन

करे, एक भाई! की. हानि (फल०) ।

शत्रुओं का नाशक, SIT ST से झगड़ा करने वाला, धन योग, ऐद्वर्य में तेन को

अधिक प्राप्ति, भाइयों का नाश करने वाला 1 सदा बांहों में पीड़ा । उच्च में--सुख देता है

व उद्वेग देता है (जा० भ०) । राहु के समान फल (खान ०) । गुणी घनो (जा० पारि०)

४--चतुर्थ भाव सें ग्रहों का फल

१-चतुथ भाव में सूर्यं का फल

अनेक मनुष्यों के साथ विहार करने वाळा, कोमल वाणी, गाने बजाने का प्रेमी,

संग्राम में जय, घन और कलत्र से सम्पन्न । राजाओं को प्रिय (मान ०) 1

नहीं, बंधु रहित, भूमि रहित, मित्र घर रहित, राजाको सेवा करे

पितरों की सम्पत्ति खरचं करे (फल०) ।

सुखहीन, वेश्या भोगी, छात्र, बहुत, पागल की तरह घूमे (खान०) ।

सौख्य वाहन, घन से हीन, पितृ वैरी. एक जगह निवास नहीं (चलनिवास) (जा०म०) ।

हृदय रोग, घन धान्य, बुद्धि रहित और क्रूर (जा० पारि") 1

दुबंल अंग, सुख रहित, अप्रभाव, निष्ठुर, दुष्ट संगो, दुर्वुद्धि (छ० च०) ।'

सुख रहित, मन में पीडित (go जा०) ।

बांधवों का नाश, संताप, नष्ट वाहन (गर्ग) ।

बहुत सुख, संग्राम में निशचलता, बहुत स्त्रो, दुबंछ (जा० सं०) !

उसके पास मोतियों का बाहुल्य हो (यवन) ।

अंतःकरण सदा उद्विरन हो, दुःखो हो (प्रा० यो०) ।

२--चतुथ में चन्द्र का फल

अनेक प्रकार से घन से पूर्ण, प्रिय जनों का हितेच्छुक, स्त्रियों का प्रेमी, निरन्तर

रोगी, मांस मछली खाने वाला, हाथो घोड़ा आदि वाहन युक्त, महलों में क्रीडा करने

बाला (मान०) । /

सुखी, भोगी, त्यागी, मित्र और वाहन युक्त, यशस्वो (फल०) ।

दानो, अधिकारी, मलिनचित्त, पंडित (खान?) ।

जलाशयों से उत्पन्न धन को प्राप्त करने वाला, खेती, स्त्रो, वाहन ओर पुत्रों से युक्त,

देव ब्राह्मण का भक्त (जा० भ०) ।

स्त्री पुत्र से युक्त, धनो, सुखी, यशस्वी, विद्यावान्‌ (७० चं०) 1

सुखी (वृ० जा०) 1

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