भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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| ३१६ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

विद्याशील, सुख से युक्त, पर स्त्री गामो (जा० पारि०) ।

नौकर चाकर, स्त्री वाहन का सुख, मंदिर (घर) वाहन, सम्पदा मिळे (जा० सं०) ।

चन्द्र और शुक्र हो, बहुत सा रौप्य घन देता है, बहुत अन्न और रस गुहु में इकट्ठा रहे (जा० सं०) । बहुत कर मनुष्य सुखो हो (प्रा यो०) ।

३-चतुर्थ में मंगल फल

जड बुद्धि, अति दीन, श्रेष्ठ कुल से हीन, बन्धु निमित्त से दुःखी, अति दुःखी, सव

देशों में भ्रमण करने वाला, नोच सेवा में तत्पर, पराये वश में रहने वाला, पर स्त्री पर

लुब्ध चित्त (मान०) 1

मित्र, माता, भूमि, सुख, घर, वाहन रहित (फल०) 1

दुःखी, संग्राम में धैय, निर्धनो, मजबूत, निर्देय, ऋणी (खान०) 1

मित्रों और वाहन से दुःख प्राप्त, परदेश वासी, शरीर में अधिक रोग, निर्बलदेह

) (जा० भ०) । सुख रहित (बु० जा०) ।

श्याम वर्ण, अधिक मित्र वाला, शत्रु से हारने वाळा, वृथा घूमने वाला पुत्र रहित

महाकामी (ल० चं०) ।

परिवार से होन, स्त्रो से निजित, पराक्रमी (जा०.पारि०) 1

( 5 पृथ्वी से जीविका, परदेश ब्रासी, कीच वाले देश में व गृह में निवास

(जा० सं०) ।

शस्त्रो से युक्त तथा ताम्बे से युक्त (यवन०) ।

अन्तःकरण सदा उद्विग्न हो, दुःखी हो (प्रा० यो०) ।

४-चतुथं भाव में बुध का फल

घन से रणं हो, पापाक्रांत हो, भाईयों का नाशक हो । अपने घर या उच्च में हो

न पत्तियों से पूणं, बुद्धि से युक्त, निर्लज्ज, क्षीण जंघा, दुर्वछांग, बाळपन में रोगी,

मान०) ।

विद्वान्‌, चाटुवाक्य, सुखो, मित्र, भूमि, अन्न सहित भोगी (फल०) ।

पुत्रहीन, दुष्ट शरोर, गोत प्रिय, दानी, मिष्टमाषी, आलसी (खान०) ।

श्रेष्ठ वाहन, ओर अन्न धन सहित, गान विद्या और नृत्य में राच, विद्या और भूषणों का प्राप्त कर्ता (जा० qo) ।

बहुत नोकर और यश से युक्त, प्रवीण बोलने वाला, भाग्यवान्‌, सत्यवादी (७० चं०) । पंडित (qo जा०) (प्रा० यो०) ।

परिवार रहित, श्रेष्ठ ज्ञानी, धनी, पंडित (जा० पारि०) 1

पापरहित, बहुत मित्र, बहुत घन, अनेक रस विलासी । पापयुक्त हो तो भिन्न प्रकार का फल (जा० So) । घर में सुवणं हो (यवन०) ।

५-चतुर्थं में गुरु का फल

सदा म पाने वाला, नाना प्रकार के घन ओर वाइन आदि से हृषित, राजा की कृपा से अधिक सम्पत्ति प्राप्त (मान०) । =: की

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