भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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भिन्न-भिन्न भावों में ग्रहो का फल : ३११

६--धन भाव में शुक्र का फल

पर घन से घनी, स्त्री को स्वतन्त्र घन देने में तत्पर, चांदी, शोशे का व्यापार

करने वाळा, बालकों के समान, गुणों से युक्त, पतली देह, मोठे वचन बालकों से

सुख युक्त ( मान० ) । कवि हो, घन युक्त ( फल० ) 1

मिष्ट भाषो, चतुर, दुशाला आदि वस्त्रों से युक्त ( खान० ) ।

श्रेष्ठ अन्न और पान में तत्पर, श्रेष्ठ वस्त्र भोर भूषण, घन वाहन युक्त, विचित्र

कार्य का जानने वाला ( जा० भ० ) ।

घनी, विद्वान, भाइयों से पूज्य, राजाओं से भी पूजित, यशस्वी, गुरु का भक्त, कृतज्ञ

( छ० चं०) । वाणो सुन्दर ( वृ०जा० ) 1

विद्या काम कला का ज्ञाता, घनवान्‌ ( जा० पारि० ) ।

शुभ राशि या शुभ दृष्टि युत हो--विद्या से इकट्ठे किये हुए घन वाला या स्त्री

जनों से घनो रहता है । बुध को दृष्टि हो तो घनो हो (गर्ग) ।

घन में शुक्र हो या शुक्र की दृष्टि हो--घनवान्‌, बहुत शास्त्र का ज्ञाता, मनोहर वाणी,

सभा में चतुर हो 1 घन में शुक्र हो पाप या शत्रु ग्रहों से युत या दृष्ट हो--राजा या चोरों

से घन हानि हो मार्ग में बिष्न हो ( जातक रत्न ) ।

घन मैं शुक्र हो और सूर्य चन्द्र की दृष्टि. हो--धन देने वाला हैँ ( छा० सं० ) ।

घन में शुक्र--कलह करने वाला, मैथुन प्रिय, साहित्य प्रेमी, सुनेत्र, नाना प्रकार की

कला जाने, खेती बगीचे आदि में प्रेम हो 1 मीठा अन्न व नाना प्रकार का रस प्रिय हो।

रत्न परीक्षा जाने । रत्न का संग्रह हो, बुघ के प्रभाव से विद्या आवे ( प्रा? यो० )।

७--धन भाव में शनि का फल व

दूसरे के वाक्यों को सहन करने वाला, घन से युक्त, चंचछ नेत्र, चोर (मान०) ।

सूयं समान फल, घनवान्‌, मुख रोगी, राजा का घन हरे (वु० जा०) ।

कुरूप चेहरा, घन रहित, कुमार्गी, उत्तर जीवन में वह विदेश में घन ओर दुसरे सुख

से युवत रहे (फल०) ।

उच्च, स्वक्षेत्र के बिना अन्य राशि मे--व्यसन युक्त, मनुष्यों से त्यागा हुआ, कुम्भ

राशि का--परदेश में वाहन और राज्य मान्यता, को प्राप्त (जा० भ०)।

घन हीन, वात पित्त और कफ से आतुर, देह में हाइ और पित्त रोग वाला, थोडे

गुण वाला । असत्य वादी, चंचल, घूमने वाला, दरिद्र और ठग (जा० पारि०) । -

लोहा घन वाला होकर काष्ठागार से घन का संचय करता है, नीच विद्यानुरागी व

दीन दुःखी (गगं) 1

घनों से हानि, निष्ठुर और दुःखी (जातक रत्न) ।

घन में शनि या मित्र और सौम्य ग्रह से युक्त दृष्ट हो, दया, घमं, सत्य से युक्त ।

घन में शनि पाप ग्रहों से या शत्रु ग्रहों से युक्त दुष्ट==घन का नाश, उसकी बहन