भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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'३१८.: ज्योतिष-शिक्षा, तृताय फलित खण्ड

उसके पास लोहा और शस्त्र होता है (यवन) ।

अन्तःकरण सदा उद्विग्न भौर दुःखो (प्रा० यो०) 1

८-चतुर्थ में राहु का फल

घन और बंधु से रहित, गाँव के एक किनारे पर घर बना कर रहे, नीच से स्नेह,

अति चुगल खोर, बडा पापी, एक कन्या हो, दुर्बल स्त्री (मान०) ।

मूर्ख, दुःख उत्पन्न कर्ता, मित्र युक्त, अल्पायु, कभी-कभी सुखी (फल०) ।

सुख नाश, सज्जनता और मित्रों के सुख से हीन, सदा भ्रमण शील (जा० भ०)।

सदा दुःखी, परदेश में भ्रमण, मूख, विवादकारी, सुख हीन, मित्र विपक्ष में हो

जावे (मान०) । i -

स्त्री आदि जनों का अवरोध करने वाला (जा० पारि०) ।

बन्धु को पीडक, वृष ककं मेष इनका हो तो बंधु का देने वाला (जा० सं०) ।

९-चतुथ में केतु का फल

कभी माता का सुख नहीं हो या वाल्यावस्था में माता मरे, मित्रवर्गो के सुख ये

होन, पिता से प्राप्त किये गृह घनादि का नाश हो। उच्च का हो तो वांघवों से सुख

पावे अधिक समय तक परदेश में रहे । सदा व्यग्र अर्थात्‌ चिन्ता बलेश युक्त रहे 1

अपनो भूमि खोवे, वाहन और मातृ सुख नष्ट, अपना देश त्याग विदेश में रहे और

दूसरे के घर में रहे (फल०) ।

माता का सुख कभी न हो, भित्र वर्ग और पिता से नाश को प्राप्त, आतुहीच ।

उच्च का हो--तो पूर्वोक्त सव प्रकार के सौख्य की प्राप्ति :थोड़ा सुखी, सदा व्यग्रचित्त

(जा० भ०) । राहु के समान फल (मान०) । दूसरों को दोष लगाने वाला (जा० पारि०)।

माता पिता को कष्ट करता है। अति चिता से कष्ट, मित्र सुख से हीन (जा० सं०) 1

५-पंचस भाव सें ग्रहों का फल

१-पंचम में सूये का फल '

वाल्यावस्था में दुःख, घन हीन, युवावस्या सें व्याधि युक्त, एक पुत्र हो, अन्य पुरुषों

के घरों में रहने वाला, शूरवीर, चतुर, वुद्धिमान्‌, विलासी, क्रूर कर्म करने वाला, दुष्ट

मन वाला (मान०) ।

सुख घन संतान रहित, अल्पायु, बुद्धिमान्‌, जंगली देशों में भ्रमण (फल०) ।

मुर्ख, अल्प पुत्र, व्याधि युक्त, क्रो घी, धमंहीन (खान०) ।

राजा का प्रिय, चंचल बुद्धि, परदेश में रहने वाला (जा० पारि०) ।

~ पृंताम रहित, (A शिव पावंः यती का भक्त, सौख्य रहित, सत i कर्म और घन से होन,

क्रोधी, कुरूप, शील वर्जित, कुसंग से लब्घ वृत्ति वाला (go चं०) ।

घन और पुत्र रहित (qo जा०) 1

संतान न हो, होवे तो सूर्य की दशा में नष्ट हो । (प्रा० यो०) 1

स्थिर बुद्धि (सुयं जातक) ।