भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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मिन्न-भिन्न भावों में ग्रहों का फल : ३१९

सूर्य बली हो--पिता नष्ट । सूर्य स्थिर राशि में--पहिले पुत्र का नाश । सूर्य चर राशि मे--पुत्रो को नहीं मारता । सूर्य अन्य राशि में--पुत्र नाशक (जा० स॑०) 1 २.-पंचम Š चन्द्र का फल

सुख भोगी. अनेक पुत्र, वश्य स्त्रो सहित । क्षीण चंद्र होकर शत्रु क्षेत्री हो--स्त्री सुख, पुत्र पोत्रों के सुख से रहित (मान०) । अच्छे पुत्र, अतिशय बुद्धि, qg गति, मंत्री हो (फल०) तेजस्वी, असावघान चित्त (खान०) । इन्द्रियजितू, सत्यवादी, प्रसन्न, धन और पुत्रों से सब सुख प्राप्त, श्रेष्ठ संग्रह करने चाला, शीलवान्‌ (जा० wo) । | पुत्रों से युक्त, रोगी, कामी, भयानक, खेती के रसों से युक्त, विनयी (go चं०) à पुत्रवान्‌ (१० जा०) (प्रा० यो०) । Ë मंत्र क्रिया में आसक्त चित्त, दयावान्‌, धनी, मायावी (जा० पारि०) । चंचल बुद्धि (सूयं जातक) ।

कन्या संतान हो, पुत्र हीन । चन्द्र वली- -माता नष्ट । क्षीण.व पाप युक्त-चंचल कन्या हो (जा० सं०) ।

३-पंचम में मंगल का फल

पुत्र रहित, पाप में मन, अति दुःखी । स्वक्षेत्री या उच्च का--कृष तथा मलिन शरीर, एक पुत्र हो (मान०) 1

दुःखी, सन्तान रहित, अनथं प्राप्त, चुगल खोर, बलहोन मन का (फल०) । थोड़ा बोलने वाला, निर्वु'द्धि, पुत्र घन का सुख नहीं, बातकफ रोगी, क्रोधी, मुख्यतः थेट में रोग (खान०) ।

कर्क और बात रोग से पीडित, स्त्रो, मित्र, पुत्र सुख से होन, उल्टो बुद्धि वाला {जा० भ०) । पुत्र रहित, घन रहित (qo जा०) |

कुत्सित पुत्र वाला । सदा रोगी, भाइयों से विरक्त हो (go चं०) 1

क्रूर, घुमने वाला, चपळ, साहसी, विधर्मी, भोगी, घनी (जा० पारि०) 1

घोर बुद्ध (सूर्य जातक) ।

सन्तान न हो, हो तो सूर्य की दशा में नष्ट (प्रा० यो०) । ४-पंचम में बुध का फळ $ सुख युक्त, घनी, बुद्धिमान, सन्तोषी, रूपवान्‌, साहसी (खान०) । पुत्रों के सोख्य युक्त, बहुत मित्र, मंत्र वाद में चतुर, श्रेष्ठ शोल, लीला युक्त (जा० भ०) 1 ०] पुत्र और पात्रों से युक्त, सुंदर, बुद्धिमान्‌, सुखी (छ० चं०) ।

मन्त्री (qo जा०) । पुत्र a ४“ का पात्र, खिले कमल सा मुंह, सदा सुखी, बड़ा पवित्र, देव गुर

ब्राह्मण का भक्‍त (मान०) । š