भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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३२० : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

विद्वान्‌, सुखी, प्रतापी, कई सन्तान, मांत्रिक (फल) ।

मंत्र तथा अभिचार 'में कुशल, पुत्र स्त्री विद्या घन बल से युक्त (जा० पारि०) ।

सन्तान सुख हो । बुध बली--माया नष्ट, । अस्त या शत्रू ग्रह दृष्ट--उतन्न fst

हुए पुत्र का नाश हो ।

शिक्षक या हिसाब के काम पर घुरन्धर, कन्यावान्‌ (प्रा० यो०) ।

मंगल बली- पुत्र नष्ट । शत्र, ग्रह की राशि में या शत्रू ग्रह दृष्ट या नोच या पाफ

युक्त--पुत्र शोक का दुःख (जा सं०) ।

पंचम में बुध--सुन्दर बुद्धि (सूयं जातक) ।

५-पंचम में गुरुका फल

सबका सुहृद, सुहृद जनों में श्रेष्ठ, अनेक शास्त्र में बुद्धि, सुखी, सबका प्रिय

(मान०) ।

पुत्र द्वारा क्लेश हो, बुद्धिमान्‌, राजा का सचिव (फल०) ।

पंडित, पुत्र, पौत्र सहित, धन आदि चिन्ता युक्त (खान०) ।

श्रेष्ठ मित्र, श्रेष्ठ पुत्र, मंत्र शास्त्र और अनेक घन वाहन को प्राप्त, कोमल वाणी

(जा० भ०) ।

पुत्र युक्त, घर्मवान्‌, पंडित, सुखी, शुद्ध चित्तवाला, दयालु, नम्रता युक्त (ल० चं०) t

बुद्धिमान्‌ (वु० जा०) ।

मंत्री, गुणी, विमव सार से युक्त, अल्प सन्तान (जा० पारि०) 1

सुन्दर बुद्धि (सूयं जातक) ।

सुबुद्धि युक्त और बहु पुत्रोंबाला, दानी, भोगी, गुणी, घनी, मानी । गुरु बली हो

तो नाना कष्ट (जा० सं०) । विचारवान्‌, कन्यावान्‌ (प्रा० यो०) 1

६-पंचम में शुक्र का फल

बहु पुत्र पुत्रियो से युक्‍त, . जामाता से पूजा पाने वाला, बडा घनवान्‌, गुणी, नगर

के नेताओं में श्रेष्ठ, विलास शोला स्त्री को प्रिय (मान०) ।

अखंड धन का स्वामो, दूसरों का रक्षक, अति चतुर, संतान युक्त (फल०) ।

दाता, राजप्रिय, पुत्र घन घान्य युक्त (खान०) ।

सम्पूर्ण काव्य कला सहित, वाहन अन्न से युक्त, राजा से बड़ा गौरव प्राप्त

(जा० भ०) 1

समृद्ध, सुरूप, सदा उन्नत, पुत्र कन्या ओर पोत्रोंसे युक्त, सोभाग्यशाली(ल०चं०) ।

बुद्धिमान्‌ सुख्ली (बु० जा०) ।

सुपुत्रवान्‌, घनो, रूपवान्‌, सेना ओर घोड़ों का स्वामी (जा० पारि) ।

कोमल बुद्धि (सूयं जातक) ।

पुत्र सुख, विविध प्रकार से पुष्ट ओर परमघनो, पंडित, राजमंत्रो, दडपति । शुक्र

बली हो तो पिता नष्ट (जा० सं०) । कन्यावान्‌, सुखी (प्रा० यो०) ।