सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंभिन्न-भिन्न भावों में ग्रहों का फछ : ३२१
७-पंचम में शनि का फल
पुच से हीन, घन से हीन, दुःख देने वाला । उच्च या मित्र गृही हो तो--खंगढा
होकर एक पुत्र वाला हो (मान०) ।
आंत (यहाँ वहाँ भटफने वाळा), ज्ञान संतान घन और सुख रहित, शठ और दुर्मति
(फुछ०) ।
सदा रोग से दुबल देह, घन हीन, कामदेव की हानि करने घाला, पुत्रों से भय (बा० म०) ।
पुत्र हीन, क्रिया और यश से रहित, द्रव्य हीन, कुरूप (so चं०) ।
पुत्र. और धन रहित, सूयं सरीखा फल (qo जा०) ।
नियु द्धि, चिंता युक्त, पुत्र सुख हीन, बालसी, qel, छोटा शरीर (खान०) ।
मत्त, चिरायु, सुख रहित, चंचल, घर्मारमा (जा० पारि०)।
कुटिल बुद्धि (सुयं जातक) ।
शनि बली हो--नष्ट पुत्र, शत्रु क्षेत्री--समस्त पुत्रों का नाश । उदय होकर स्व या
उच्च का--वड़ा तीक्ष्ण एक पुत्र हो 1
८-पंचम में राहु का फल
पुत्र का नाशक, महाक्रोधो, चंद्र युक्त राहु किसी अन्य स्थान में हो तो एक ही पुत्र
छो बह अति मलिन फटे कपड़े पहिनने वाळा हो (मान०) । "
नाक से वात करे, संतान रहित, कठोर हृदय, उदर पोडा हो (फल०) ।
पुत्र रहित, वेहोश, पीड़ा युक्त, मूर्ख (खान०) 1
सुखहीन, मित्रता रहित, उदर पीड़ा, विलास को हानि । .निश्वय करके प्रमको लाग करता है (जा० भ०) । डरपोक, दयाळु, दरिद्र (जा० पारि०) i कुटिछ बुढि,
(सूर्यं जातक) ।
होन मलीन पुत्र हो, सिंह व ककं का--संतान हो, अन्य राशि का--पुत्र हीन
(जा० सं०) 1
९-पंचम में केतु का फल š
सहोदर भाइयों में परस्पर लड़ाई, वायु के कोप के कारण कष्ट, अपनो बुद्धि
कारण व्यथा युक्त, थोड़े पुत्र वाळा, नौकरों से युक्त, अनेक प्रकार के बळ से पूर्ण (मा०) ।
संतान हानि, पेट में रोग, पिशाच पीड़ा, दुबु दि, खल प्रकृति (see) । दान उदर में क्षत, गिरने से कष्ट, भाइयों से प्यार करने वाछा, थोडे पुत्र वाला, सदा
बल युक्त (जा० भ०) । र
राहु समान फल (खान०) । शठ, जळ मोर, विशेष रोगी (बा० पारि०) 1
संतान हानि, विद्या ज्ञान से वित, मय त्रास को प्राप्त सदा दुःखी, विदेश के
गमन में तत्पर (जा० सं०) । $
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