भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

पृष्ठ 338, कुल 418 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 338

. ३२२ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतोय फलित खण्ड

६-छठे भाव मं ग्रहों का फल

१-छठे भाव में सूर्यं का फल

योगाम्यासी, बुद्धिमान्‌, स्वजनों का हितेच्छुक, स्व जाति को आनन्द देने वाळा,

दुबेल अंग, गृहस्थ घर्म पालन करने बाला, सुन्दर स्वरूप वाला, क्रीड़ा करने वाळा,

शत्रु जनों को जीतने वाला, शुभ कर्म करने के लिये पूजा पाने वाला, दुढांग (मा०) ।

राजा हो, प्रसिद्ध, अच्छे गुण युक्त, धनी और जयी (फळ०) ।

घनी, निरोगी, शत्रु नाशक, नाना के घर से लाम (खान०) ।

सदा सौर्य युक्त, शत्रु हंता, बलवान्‌, अच्छे वाहन युक्त, बहुत तेजवान्‌, राजा का

मंत्री (जा० भ०) ।

शत्रु रहित, प्रसिद्ध मान वाळा, सुखी, पवित्र, वोर, अनुरागो गोर राजा का

सलाहकार, बली और शत्रुओं को जोता हुआ (क ० चं०) ।

कामी, शूर, राज्य अभिमानो, ख्याति ओर श्रीमान्‌ (जा० पारि०)।

घर में बहुत से बेल होते हँ । उसके बकरी ओर गोधन रूप बहुत घन होता है

उसकी पशुशाला बडी होगो, अँटों आदि से भी युक्त हो ।

विष और शन, से संताप, क्षुद्र शत्रु, काष्ठों का नाश, काष्ठ ओर पत्थर के प्रहार

से विदोणं देह, कान, इनु, वाणी, दांत, नख घाव वाले अंग से युक्त (यवन) 1

शत्र, या रोग का नाश (प्रा० यो०) ।

२३ वर्ष में घन देता है (हिल्लाज) ।

२-छठे भाव में चंद्र का फल

क्षीण चंद्र--नाश होने वाला, भोगों को न भोगने वाला । अनेक व्याधि वथा दुःख

हो । पूर्ण चंद्र या स्वगृही अनेक सुख हो (मान०) ।

दुर्बल शरीर, कुरूप, रोगी, सदा परेशान (खान०) ।

मंदाग्नि रोगी, दया रहित, क्रूर, बड़ा आलसी, कठोर, दुष्ट चित्त. क्रोधवान्‌, बहुत

शत्रू, वाला (जा० भ०) ।

द्रव्य होन, कोमल देह, अति आलसी, मंदाग्नि, तोदण दृष्टि, वीर (go चं०) ।

बहुत पुत्र, शरीर सुकुमार, मंदारिन, उग्र स्वभाव, आळसी, कार्य करने में अवज्ञा

करने वाला, निरुद्यमी (qo जा०) ।

क्षीण चंद्र--अल्पायु । पूर्ण चंद्र--अति भोगी, दीर्घायु, (जा० पारि०) ।

जलोदर रोग से संतप्त, रोग ओर जल से उत्पन्न विकार से युक्त, कफ से संतप्त,

छरा चंद्र हजार दोष देता हे (यवन) ।

कन्या सन्तान वाला हो, भ्राता भगिनी तथा मामा का सुख हो, क्षीण चंद्र मृत्यु

देता है। चेंद्र बलवान्‌ हो तो गोषन देता है (जा० म०)

बहुत र सुकुमार, क्षा मंद, उग्र स्वभाव, आलती (प्रा० यो०) । शत्रु पीडा, कुछ देवता का कोप, आछसी (सोम सिद्धान्त) ।