भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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३२४ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

विध्न qaq, बहुत शत्रु वाला, निष्ठुर, उद्वेग वाल, बुतिद्दीन, कामुक (ल० चं०) ।

हात्रु रहित (qo जा०) 1 कामी, शत्रुओं को जीतने वाला और अवल (जा० पारि०) ॥

चंद्र समान फल, आता, भगिनी तथा मामाओं का बढ़ा सुख, मामा पुत्र युक्त,

सुखी व घनवान्‌ (जा० सं०) । ४० वर्ष में वैरियों को भय देता है (यवन) ॥

चंद्र के समान हजार दोष देता है (हिल्लाज) ।

सारसी, क्रोधी, दुष्ट वाक्य बोले, दूसरे से पराजय, स्त्रियों का प्रावल्य, अति

आहार (सोम सिद्धान्त) ।

६-षष्ठ में शुक्र का फल

अस्त हो तो दुष्ट कुछ में जन्म लेकर भी बडा पण्डित हो, उच्च का--शत्रु को जीत ने

बाळा, सुख पाने वाला (मान०) ।

शत्रु रहित, घन रहित, युवती स्त्रियों से भ्रष्ट, दुःखी (फल०) 1

रोगी, मूर्ख, दयाहीन, मित्र रहित (खान०) ।

स्त्रियों का प्यारा नहीं, कामदेव से हीन, fad, शत्रु का भय (जा० भ०) ।

दंभो, जड़, हानि जन्म से युक्त, दुष्ट संग वाला, लड़ाई करने वाला, पिता का बैरी

(€० चं०) i न रहित (qe जा०) । झोक अपवाद से युक्त (जा० पा०) ।

आता भगिनी तथा मामाओं का-सुख, मामा कन्या संतान वाला, पावों में रोग,

(जा० सं०) |

२१ वर्ष में शस्त्र से मृत्यु (हिल्लाज) ।

बुरे कर्म करे, दरिद्री, स्त्रियों से अति मित्रता, दुष्ट बुद्धि, डरपोक (सोम विद्वान) ॥

७-षष्ठ भाव में शनि का फल `

नीच का व शत्रु क्षेत्री हो-कुछ का क्षय करने वाला । उच्च fm या स्वगृहो 77

शनं फो मारने वाळा, घन ओर कामनाओं को सिद्धि को प्राप्त, qg कामो में धुण

मान०) । जल्दो-जल्दी खाने वाळा, घनी, शत्रुओं का दमन कर्ता, वृष्ट, मानी (फल०) 1

दानी दुःखी, शत्रुनाशी, राज प्रिय (खान०) 1

शत्रुओं को जीतने वाला, गुणों का जानने वाला, श्रेष्ठ कम, बहुतों का पाल कर्ता,

पृष्ट देह, प्रवल जठरारिन, श्रेष्ठ (जा० भ०) 1

विशेष भोजन करने वाला, विषय बुद्धि, शत्रु से भय, कामी, घनवान्‌ (जा० पारि०) ।

बेरियों के पक्ष से संतप्त, शूरवोर, विषय चेष्टा, बहु भोजो, कवि, शत्रुओं का दाहक

(जा० सं०) पावो में रोग (जा० सं०) ।

सिर पर पत्थर पड़ता, बिजली पड़ना, कोई का मरना (प्रा? यो०)।

८-बष्ठ में राहु का फल

« झंत्रु का नाश करे, घन पुत्र भोग प्राप्त, उच्च का-अनेक अनर्थों का नाशक, परस्त्रो

गमन अवश्य करे (मान०) ।