सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंभिन्न-भिन्न भावों में ग्रहों का फल : ३२५
शन्रुओं द्वारा सताया जावे, या दुष्ट लोगों से दबाया जावे, गुदा में रोग, घनी गोर दीघंजोबी (Gso) ।
बैरियों का नाशक, घन लाभ, पशु पीडक, कमर में पीड़ा, म्लेच्छों से समागम, बड़ा घरूवान् (जा० qo) ।
म्लेच्छ राजा से घन प्राप्त, उच्च हृदय, शत्रु नाशक (खान०) ।'
शत्रु संहारक, दीर्घायु, विशेष सुखी, कुलीन (जा० पारि०) ।
बहुत सी भैसों का घन हो (जा० qo) à
९-षष्ठ में केतु फल
मामा द्वारा मान हानि, वैरियों का नाश, चोपायों के कारण सदा सुखी, नीच
प्रकृति, शरीर किसो विकार से युक्त, सब व्याधियों का नाश (मान०) 1
ये उत्तम गुण युक्त, प्रसिद्ध, प्रभुता प्राप्त, शत्रु का दमन कर्ता, अमोष्ट सिद्धि प्राप्त
०) ॥
शत्रुओं का नाशक, मामा के पक्ष में मान भंग को प्राप्त, चोपायों से सुखी, सदा
घन लाभ, निरोगी देह, व्याधि नाद्य (जा० भ०) ।
राहु के समान फल (खान०) (जा० सं०) ।
बन्धु प्रिय, उदार, गुण प्रसिद्ध, विद्वान्, यशस्वी (जा० पारि०) ।
शत्रु से जय, बहुत आहार, शूर, विजयी (सोम सिद्धान्त) ।
७-सप्तस भाव सें ग्रहों का फल
१-सप्तम में सूयं का फल
स्त्रियों के साथ विहार करने वाला, अन्य सुखों से हीन, बडा चंचल, पाप कमं में
भ्रवृत्ति, फूला शरीर, न अति छम्बा न अति छोटा, कपिल नेत्र, कुरूप, पीले रंग के केश
(सान०) ।
राजा का कोप, कुरूप, बिना स्त्री के भटकता फिरे, अपमान सहे (फल०) 1
चिता व्याकुल, कामो, स्त्री हीन (खान०) ।
घन हीन, देह की शोमा रहित, भय और रोग युक्त, दुष्ट स्वभाव, राजक्रोघ से
दुःखी, कृश (जा० भ०) 1
दुष्ट स्त्री याला, दुष्टों से प्रसन्न, थोडे पुत्र वाळा, गुह्य रोगो, पाप सहित (go
चं०) । स्त्रियों से हारा हुआ (ge जा०) i
स्तौ वंष्या हो (go पा०) 1
स्त्रो का बैरो, विशेष कोपी, शठ (जा० पारि०) 1
सत्री से विलास करने वाला ओर सुख का भागी नहों होता, चंचल, पापी होता है ।
छायु के समान शरीर वाला न अति छोटा न अति बड़ा, कपिल वर्ण नेत्र, खूपवाळा,
[पिंग केशों से युक्त, छुमूति (जा० सं०) ।