सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 342, कुल 418 में से
संदर्भ में पढ़ें“३२६ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
सूर्य की दृष्टि हो या वर्गोत्तम हो--तो उत्तम है, साँवले रंग की, लाल नेत्र, चंचल
चित्त, मनमाने भाषण करने वाली, छम्बे हाथ, राजस गुण युक्त, पांडित्य करने वाली
ऐसी उत्तम स्त्री मिले, यदि उसमें पाप का योग हो तो-अरिष्ट हो (gre यो०) ।
२-सप्तम Š चन्द्र का फल
उत्तम स्त्रियों का स्वामी, सुवर्ण से सम्पन्न, सुंदर देह, क्षोण हो वा पापगृही या!
पाप दृष्टि हो--सुख का भागी न हो, स्त्री रोगिणी हो (मान०) ।
देखने में अच्छी, सुन्दर, स्त्री से प्यार किया गया अति सुभग (सुन्दर) (फछ०) १
बड़ा अभिमानी, कामातुर, घन और नम्रता रहित (जा० भ०) ।
निरोगी, घनवान्, सुन्दर व यशस्वी (खान०) ।
दुःखी, कुष्ट रोगी, वंचक, कृपण, बहु शत्रु, पराई स्त्री से संपक (go चं०) t
ईर्षावान्, दूसरे को मलाई को बुराई मानने वाला (qo जा०) ।
दयालु, भ्रमणशील, स्त्री के वश में रहने वाला, भोगवान् (जा० पारि०) ।
राशि के सदृश स्वभाव वालो स्त्री हो (qo पा०) ।
पूर्ण चंद्र--सुन्दर स्त्री का स्वामी, सुवणं युक्त, तथा सुंदर शरीर वाला, क्षीण,
पापदुष्ट यां पापराशि में--स्त्रा रोगिणो हो, सुख भागी नहों होता (जा० सं०) ।
लोगों के संतति का द्वेष करे व स्त्रियों पर बहुत प्रेम करे । वर्गोत्तम हो तो मूद झरीर प्रिय बोलने वाळी स्त्री हो (प्रा० यो०) 1
३-सप्तम में मङ्गल का फल
नोच या शत्रु क्षेत्री--स्त्री के मरण का दुःख हो 1 मकर का या स्वक्षेत्री--एक ही
विवाहिता स्त्री जीवित रहे । चपल बुद्धि वाली, खम्बी, दुष्ट चित्त वाली और कुरूपा
पत्नी हो (मान०) ।
अनुचित कार्य कर्त्ता, रोग से ग्रसित, रास्ते से भटकता हुआ अपनो स्त्री को
खोवे (फर०) ।
कामी न हो, सदा दुःखो, मूखं, अत्याचार करने वाली, सदा छड़ाई में उद्यत, स्त्री
q जीये, यात्रा, स्त्रो सुख न हो (खान०) ।
अनेक अनथं से व्यर्थ चिता से ओर शत्रु समूह से पोडित, स्त्री जनित दुःख से संतापित (जा० भ०) ।
क्रोधी, नीच सेवी, वंचक और निटुर रुधिर से आरक्त (go चं०) ।
स्त्री का जीता हुआ (वृ० जा०) ।
रजस्वला ओर व्या स्त्रो का संग, सुंदर स्तन वाली स्त्रो (qo पा०) ।
स्त्री के कारण विलाप करने वाला, रण प्रेमो (जा० पारि०) ।
युवती स्त्री हो, स्त्री को लाल कांति हो, पुरुष स्वभाव वाली स्त्रो हो या स्त्री हीन
हो | नोच या शतु क्षेत्रो--स्त्रो मरण का दुःख हो । मकर या स्वराशि में-चं बल, बुद्धि से गति विणाळ, दुष्ट चित्त तथा विरूप, सत्कृत स्तरो को प्राप्त (जा० सं०) ।