भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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भिन्न-भिन्न भावों में ग्रहों का फल : ३२७

मंगल की दृष्टि हो या वर्गोत्तम हो--सांवला शरीर, क्रूर नेत्र, दुष्टवाक्य, अति चंचळ, मनमें कपट, चोर, झूठी, मार खाने वाली, पति को दुःख देने वाली, ज्वर फोड़ा,

आदि रोग पीड़ित, खांरा तीखा, खट्टा खाने वाली, विशेष कामो स्त्री हो । इसमें पाप योग हो तो देह रोग, प्रदर परमा वगंरह रोग हो, इसमें पाप शनि का

योग हो तो मंगल में बताये फल से अधिक दुष्ट हो (प्रा० यो०) ।

४-सप्तम में बुध का फल

चंचल, मध्यम दृष्टि । शुभ क्षेत्र हो तो--उत्तम कुल की स्त्रो fas (मान०) ।

विद्वन्‌, सुन्दर वेश घारण करे, बड़प्पन प्राप्त हो, स्त्री घनवान्‌ मिले (फल०) ।

धनी, सत्यवगता, मुसाहिब, परोपकारी, रूपवान्‌, बुद्धिमान्‌, सुशील (खान०) ।

श्रेष्ठ शोलयुफ्त, वैभवयुक्त, सत्यवक्ता, स्त्री, सुवर्ण, पृत्रयुक्त, (जा० qo) 1

रूप. ओर विद्यायें अधिक, सुशील, कामशास्त्र का ज्ञाता, स्त्रियों में पुज्य हो

(छ० चं०) । घर्मज्ञ (qo जा०) ।

उसको वेश्या, नीच जाति या बनिया स्त्री से संग होता ë (go पा०) |

व्यंग शरीर, शिल्पकला का ज्ञाता, विनोदी और चतुर (जा० पारि०) ।

पुरुष चंचल वृत्ति से युक्त हो, पुरुष स्वभाव वाली स्त्रो मिळे, शुभ राशि का हो

तो--उत्तस वंश में उत्पन्न स्त्रो मिले (जा० सं०) ।

उत्तम स्वभाव वाली स्त्री हो, पुरुष स्त्री के आघोन हो, घमं जानने वाला हो

(प्रा० यो०) ।

५--सप्तम में गुरु का फल

राजा सम सुखी, अमृत तुल्य वाणी, उत्तम बुद्धि, दिञ्यमूमि दशन में प्रिय (मान०) ।

अच्छी स्त्री, पुत्र प्राप्त, अनेक सुभग, अपने पिता से अधिक उदार (फल०) 1

बड़ा पंडित, विनीत, सुखी, स्त्री सुखयुक्त, चतुर (खान०) ।

शास्त्र में अभ्यास करने वाला, नम्रता सहित, घन से अत्यन्त सोख्य प्राप्त, राजा

का मंत्री, काव्य करने वाला (जा० wo) ।

काम में चित्तवाला, बड़ा बली, घनो, दाता, प्रगल्म ओर चित्र कमं करने वाला

(छ? चं०) 1 ब्राह्मणी गर्भिणी का संग, कठोर स्तन वाली स्त्री हो, (qo पा०) 1

भीर, रमणीय स्त्री वाला, पितर गुरु का बैरी (जा० पारि०) 1

पित्ता से अधिक (चृ० जातक) 1

राजा के तुल्य सुख प्राप्त, अमृत सा मोठा वचन, पंडित, सुन्दर शरीर, प्रियदर्शन,

पुत्रों को उत्पन्न करने वाली मनोहर स्त्री हो । पुरुष स्वभाव वाली स्त्री हो, गुरु बली

हो, तो सुवर्ण समान वणं की स्त्री हो (जा० सं०)।

उत्तम स्वभाव की स्त्री हो, बाप को अपेक्षा अधिक गुण हो (प्रा० यो०) 1