सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 344, कुल 418 में से
संदर्भ में पढ़ें३२८ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
६-सप्तम में शुक्र का फल
बहुत पुत्र तथा घन सम्पन्न, कुलीन स्त्री हो (मान०) ।
अच्छी स्त्री हो परन्तु बुरी स्त्रो से संवन्ध रखे, स्त्री को खोये , घनी होवे (@se) i
दयावान्, चतुर, कलाज्ञ, स्त्री चिता युक्त (खान०) ।
बहुत कलाओं में चतुर, जल क्रोड़ा का प्रेमी, विषय करने गें बड़ा चतुर, अत्यन्त
चंचल, स्त्रियों से मित्रता करने वाळा (जा० भ०)।
घनी, सुन्दर स्त्री युक्त, निरोग, सुखी, बहुत भोग वाळा (छ० चं०) ।
कलह प्रिय, स्त्री अभिलाषो, पिता से अधिक गुणी (qo जा०) !
स्थूल सुन्दर स्तन वाली स्त्री हो (वृ० पारा०) ।
वेश्या का स्वामी, सुन्दर और व्यंग (जा० पारि०) ।
बहुत से पुत्र और घन से युक्त उत्तम वंश में उत्पन्न हुई स्त्री का स्वामी, सुन्दर
शरीर, प्रसन्न चित्त, सुखी, स्त्री स्वभाव वालो युवती स्त्री हो । शुक्र बलवान् होतो
सुवर्ण समान वणं वाळी स्त्री मिले (जा० सं०) ।
उत्तम स्वभाव वाली स्त्री मिले, बाप की अपेक्षा अधिक गुण हों (प्रा० यो०) ।
७-स॒प्तम में शनि का फल
स्त्री की मृत्यु हो, अनेक रोग, बड़ा अभिमानी, अंगहीन, मित्र: के वश की कन्या के
साथ मित्रता करने वाला (मान०) ।
बुरी स्त्री से विवाह हो, गरीब हो, यहाँ वहाँ भटके और विह्वळू (meo) ।
रोग से निर्बळ, आजीविका तथा मनुष्यों से मित्रता रहित, स्त्री घर यौर छन्न स्त,
दुःखित (जा० भ०) ।
स्त्री सहित रोगी, बहुत शत्रु, विवरण, दुर्बळ, मलिन (se so) 1
सूयं समान फल, स्त्री के वश (qo जा०) ।
बुरे आचरण, कृश, कम बोलने वाला, निर्बुद्धि, पराधीन (खान०) ।
नीच जाति या रजस्वला का संग, रोगिणी दुनळी स्त्री हो (वृ० पारा०) ।
रास्ते के ओझा ढ़ोने या चलने से तप्त, धीर, धनिक (जा० पारि०) 1
वृद्धा स्त्री हो या नपुंसक स्वभाव वाली स्त्रो हो, स्याम वर्ण की स्त्री होवे (जा० सं०)॥
बिश्राम भूत स्त्री का नाश करता है, पुरष को कपटो और अंगहीन करता हैं । वह
मित्र के वंश से हारे हुए शत्रुओं वाला (जा० सं०) । स्त्री से पराभव पावे (प्रा० यो०) ।
८-सप्तम में राहु का फल
धन की हानि युक्त स्त्री हो, अनेक भोगों का देने वाला । पापग्रहों के साथ राहु
हो-महापापनो, कुटिला, कुशीला भार्या मिळे । (मान०) ।
५ स्त्रियों से सम्बन्ध करने के कारण घन Tara, अपनी प्रिया से वियोग, अवीयं,
स्वतंत्र, अल्पबुद्धि (फल०) ।
स्त्री से विरोध करने वाला या स्त्री को नाश करने बाला, प्रचंडरूप क्रोघो झगड़ाछू
भार्या (जा० भ०) ।