भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

पृष्ठ 347, कुल 418 में से

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भिन्न-भिन्न आवों में ग्रहों का फल : ३३१

( s". प्रसिद्ध, दीर्घ जीवो, अपने कुटुम्ब का पोषक, अधिपति, दंडपति (जज) फल०) ।

विनोत, विशेष गुणों में प्रसिद्ध, घनी, (जा० पारि०) ।

जंघा और पेट में शूळ रोग से पीड़ा, सुख पूवंक, तीथं में मृत्यु पापग्रह युक्त हो तो

मृत्यु (जा० सं०) । प्रख्यात व गुणी, ज्वर ताप झूल होकर तोथं में मरता है (प्रा० यो०) ।

५-अष्टम में गुरु का फल

उत्तम तोर्थ में जाने वाला, योगाम्यास करने में निरत (मान०) ।

गरीब नीच सदृश अपनी जीविका प्राप्त करे, पाप युक्त हो, दीर्घ जीवी (फल०) 1

दया रहित, परदेश वासी, मुखरोगी, क्रोधी (खान०) ।

दूत कमं की वृत्ति, मलिन, अत्यन्त दीन, विवेक रहित, नम्रताहीन, आलसी, दुबँल

देह (जा० भ०) ।

सदा रोगी, कृपण, शोक संयुक्त, बहुत शत्रु, कुकर्मी, कुरूप (छ० चं०) 1

नीच कर्म (qo जा०) । बुद्धिमान्‌, नीचकरमं, दीर्घायु (जा० पारि०) ।

( अ का या स्वगृहो--ज्ञान से तीथं में मरण, अन्यराशि *r— से मरण

जा० सं०) ।

उचित कर्म, रोग का ज्ञान नहीं होता परन्तु सावधान होकर मरे (प्रा० यो०)।

६-अष्टम में शुक्र का फळ

निबंल, घर्म में तत्पर, राजा का सेवक, मांस का प्रेमी, विशाल नेत्र, चोथी अवस्था

पें मृत्यु (मान०) 1 दोघं जीवो, घनी, पृथ्वी का शासक (फल०)।

स्त्री घन सौख्य रहित, कटुवादी, संग्राम प्रिय, अभिमानी (खान०) ।

प्रसन्न स्वरूप, राजा से दान प्राप्त, शठ, निर्भय, अभिमानी, स्त्री और पुत्र की

चिता से युक्त (जा० भ०) ।

रोगी, युद्ध प्रिय, वृथा चलने वाला, कायंहीन, मनुष्यों में प्रिय (७० चं०) ।

नीच (qo जा०) ।

दीर्घायु, सब सोस्य युक्त, अतुल बल, घनिक (जा० पारि०)।

पिता की अनृणता और तीथं में मरण, पिता के कुछ को पवित्र करता है.

(जा० qo) । उचित कर्म करे, प्यास से व्याकुल हो, तीर्थ में मरण (प्रा० यो०) L

७-अष्टस में दानि का फल š

दुःखभागी होकर देशान्तर में रहने वाला, चोरी के अपराध में नोच के हाथ सेः

, नेत्र रोगो (मान०) 1

के अस्वस्थ, - रहित, बवासोर का रोगी, दुष्ट प्रकृति का, बुभुक्षित, मित्रों से तिर”

स्कारित (फल०) ।

दुबल देह, ददु रोग, भय ओर संताप से हीन, आलसी, फुड़ियों का रोग (जा०-

we) । अल्प संतान, नेत्र कला रहित, सूर्य के समान ww (qo जा०) ।

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