भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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:३३२ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

क्रोघातुर, दरिद्र, बहुत रोग युक्त, मिथ्या विवाद करने वाळा, बात रोगी

(७० चं०) । वीर क्रोधियों में अग्रसर, विख्यात बल, धनवाला (जा० पारि०) ।

बिदेश में या नीच के समीप मृत्यु, हृदय शोक, खाँसी, विशूचिका आदि वाना

“प्रकार के रोग (जा सं०) ।

थोड़ी संतति, मन विकल, भूख ळगकर परदेश में मरे, अपने कुल व माया के कुछ

का नाश करे, क्षुघा तुषा से पीडित होकर मरे या शत्र, से, विष खाकर, सर्प या अग्नि

से जल कर मरे । क्रूर ग्रह युत हो ठो चोर से मरे (प्रा० यो०) 1

८-अष्टम में राहु का फल

सदा रोगी, पाप में निरत, दुष्ट, चोर, दुर्बल, कायर, घन से सम्पन्न, मायावी

“मान०) ।

अल्प जीवन, अशुद्ध कमं करना, अंग दाषपूर्ण, बात रोग से रोगी, अल्प सन्तान

(फल०) ।

अनिष्ट, नाश को प्राप्त, लिंग और गुदा में पीडा, प्रमेह रोग, अंड वृद्धि सहित

विकलता (जा० भ०) । !

सदा मुसाफिर, घर्म होन, क्रोधी, बुरे आचरण, दरिद्री (खान०) 1

क्लेशी, अपवादी, दीर्घसूत्री, रोगी (जा० पारि०) ।

दुष्ट, चोरी की निन्दा से मरण, कष्ट यातना (जा० सं०) ।

नाना प्रकार की वेदना होकर मरे (प्रा० यो०) ।

९-अष्टम में केतु का फल,

बवासीर, भगन्दर आदि रोग, हाथी घोड़ा आदि सवारी से गिरने का भय, घन की

रुकावट । १, २, ३, ६ या ८ राशि का हो-सदा घन लाभ (मान०) |

लघु जीवन, प्रिय जनों से वियोग, कलह में रत, शास्त्र में क्षति प्राप्त, सफळ कार्यों

में विरोध (फल०) ।

गुदा में पीड़ा । ३, ४, ६ राशि का--वाहन धन लाम। १,२, ८ राशिका

अत्यन्त लाभ (जा० भ०) । राहु समान फल (खान०) ।

पर द्रव्य, पर स्त्री में रत, रोगो, दुराचारी, विशेष लोभी । यदि शुभ ग्रह देखता

हो तो घनी, दीर्घायु (जा० पारि०) ।

नोना प्रकार की वेदना होकर मरे (प्रा० यो०) ।

९-नवस भाव में ग्रहों का फल

१-नवम में सुर्यं का फल

सत्य वक्ता, सुन्दर केश, कुटुम्ब का हितैषी, देव गुर का अनुरागी, पहली अवस्था

x में रोगी, युवावस्था में स्थिरता युक्त, धनवान्‌, दीर्घायु, दिव्य स्वरूप (मान० ) 1

पिता का द्वेषी, सन्तान और वंधु युक्त, गौ ब्राह्मण भवत (फल०) ।