सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंभिन्न-भिन्न भावों में ग्रहों का फल : ३३३
धर्म-कर्म में तत्पर, श्रेष्ठ बुढि, पुत्र और मित्र से सुख. प्राप्त, मातृ पक्षी छोगों से"
वैर करने वाला (जा० भ०)।
कुकर्मा, भाग्य रहित, विद्या और ज्ञान हीन, कुदाल (ल० चं०) ।
पुत्र य छन का सुखी, भोगी (qo जा०) ।
प्रसिद्ध, सुखी, दुसरे के घन से शोभित, ननहार से सुख नहीं (खान०) 1 पिता, गुरु का द्वेषी, विघर्म के आश्रम में रहने वाला (जा० पारि०) ।
भाग्य और पुण्य का विनाश । उच्च या स्वक्षेत्री--पुण्य व घमे करे (जा० सं०) । तीर्थं और घर्म करता है (हिल्लाज) ।
पुत्र, द्रव्य ओर सोल्य मिळे। पापयुक्त हो तो इन सबका नाश । परमोच्च हो--
राज पद देवे, तीथंयात्रा में पुण्य करता है (प्रा० यो०) ।
स-नवमसेंचन्द्रकाफळ *
अनेक प्रकार के सुख, कामिनी स्त्रियों से प्रेम | क्षोण चंद्र या नीच का हो तो
निर्मळ धर्म मार्ग का विरोधी हो, गुण रहित, मूढ़ चित्त (मान०) ।
उन्नतिशोळ, गुणो, संतान युक्त, जयो, व्यापार में आरम्भ से हो सफलता q (फल०) । तेजस्वी, धनो, ईश्वर मक्त (खान०) ।
स्त्री पुत्र, घन युक्त, पुराण कथा प्रेमी, सत्कर्मा, श्रेष्ठ तोर्थ करने वाला (जा०म०) ।
< चाद कांति दाला, अपने घमं में सदा निरत, सज्जनों में निपुण औरः पापी हो
(७० चं०) ।
सर्वजन प्रिय, पुत्रवान्, मित्रवान् वंघु, युक्त, धन युक्त (qo जा०)।
पितु कार्य तपण श्राद्ध आदि, देव कार्य पुजन आदि में युक्त, दानो (जा० पारि०) ।
यदि पुणं चंद्र हो मध्य माग धमं और पितृपक्ष युक्त । यदि क्षीण चंद्र हो तो.
सवका नाश करता है । (जा० सं०) । २० वषं में तीथं करता है (हिल्ळाज) 1
पूर्ण चन्द्र हो--सब का प्रिय, पुत्र मित्र व द्रव्य से युक्त । क्षीण चन्द्र हो तो कमी
करता 3 (घ्रा० यो०) ।
३-नवम में मङ्गल का फल :
अति रोगी, नेत्र, हाथ ओर शरीर में पीला, बहुत मनुष्यों से परिपूर्ण, भाग्य से
होन, फटे जोणे वस्त्र पढिने, विकल जनों कैसा मेष, शीलवान्, विद्यानुरागी (मान०) 1
पुत्र व घन सुख (वृ० जा०)।
यदि राजा का भी मित्र हो तो भो दूसरे से द्वेषित, पिता रहित, दूसरों को घातकः
फल०) ।
म, राजा से घोडा गौरब प्राप्त, पण्य बोर बन नाशक (qe म०) 1
राजा का मान्य, पर स्त्री रत, भाग्यवान् (खान०) । छ
कुकर्मी, पोरुष होन, नीचो से प्रेम, कर, कष्ट युक्त (छ० चं०) । `
पिता का अनिष्ट करने वाला, विख्यात (जा०, पारि०) ।