भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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भिन्न-भिन्न भावों में ग्रहों का फल : ३३५

अच्छा काम करने वाला, रूपवान्‌, प्रसन्न चित्त (खान०) । अतिथि गुरु देव का पूजक, तीर्थ यात्रा में घन खर्च, प्रतिदिन घन ओर वाहन से हर्ष, मुनि के समान भेष, क्रोष होन (जा० wo) ।

घ्म पूणं, ज्ञानी, gar, घनो, राजाओं से पूजित, नम्र, जन प्रिय (go च०) À तपसी (वृ० जा०) । विद्या, घन, स्त्री पुत्र से युक्त (जा० पारि०) । भाग्य, विधि ओर धन प्रिय, गुणी, ब्राह्मण भक्त, अपने बल से एकत्र किए भाग्य ओर बड़े उत्साह वाला (जा० सं०) ।

१५वें वषं लक्ष्मी को पाता है (हिल्लाज) ।

७-नवम में शनि का फल

घर्म में पाखण्ड, घम तथा अथ से हीन, पिता के साथ कपट, मद से युक्त, घन रहित, रोगो, पापी स्त्रो में तत्पर, होन वीयं (मान०)।

भाग्य घन सन्तान, पिता और घर्म रहित (फल०) ।

“धर्म कमं युक्त विकल देह, दुष्ट बुद्धि, अत्यन्त सुन्दर, (जा० भ०)।

घमं हीन, विवेकी, शत्रुओं के वञ्च, झुठा, पराई स्त्री में रत (go च०) à

q, घन, सुख वाला । सूर्य सरीखा फल (वृ० जा०) (प्रा० यो०) ।

अपने जमाने में बड़ा आदमी , श्रीमान्‌, मिष्ठ भाषी, सुखी, दयालु (खान०) ।

रण में विख्यात, बिना स्त्री वाला, घनो, (जा० पारि०) ।

कपट प्रघान, अच्छा कार्य करने . वाळा, मित्र देव को ठगने वाला, क्षण भाग्य,

शुभ घर्म युवत (जा० qo) |

८-नवम में राहु का फल

. चण्डाल के समान कमं, चुगल खोर, जीर्ण फरे कपड़े पहिने, ज्ञाति जनों की प्रशंसा

करने वाळा, बड़ा दीन, शत्रु से सदा भयभीत (मान०) ।

प्रतिकूल भाषणं, अपने वंश का मुखिया, गाँव या शहर का मुखिया, अघमं कार्य

करे (जा० भ०) । घनी, सुखी (खान) । घार्मिक जनों का बैरी, यशस्वी (are पारि०) 1

पथिक घर्म का अनुरागी, सत्य ब शोच से हीन, भाग्य हीन, मंद बुद्धि (जा० सं०) 1

९-नवम में केतु का फल

क्लेश का नाश, पुत्रों का इच्छुक, स्लेच्छ से भाग्य वृद्धि, म्लेच्छों से पीड़ा भी हो,

वाँहों:में रोग, तप ओर दान से हास्य वृद्धि को प्राप्त (जा० we)

दुःखों से होन हो, पुत्र का इच्छुक, नीच जाति द्वारा भाग्य वृद्धि, सगे भाई बहुन

के न होने से कष्ट, बाँह में रोग, इन कुचेष्टाओं को सुधारने के निमित्त दान नियम

“करने से उपहास को प्राप्त (मान०) 1

पाप कर्मी, पितृ हीन, अमागा, दरिद्री, धमं कार्य में दूषण (फछ०) ।

राहु के सदृश फल (खान०) ।