सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 353, कुल 418 में से
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भिन्न-भिन्न भावों में ग्रहों का फल : ३३७
चित्तचोर, उदर के समान शरीर वाळा, भूमि का काम करने वाला, बड़ा क्रोघो, ब्राह्मण गुरुजनों का भक्त, मध्यम कद (मान०) 1 कूर राजा, दाता, प्रधान जनद्वारा स्तुति प्राप्त (फल०) ।
घनी गुणी, शिफायत सार, संसार में मान्य, साहसी, दयावान्, सब पदार्थं घर में हों, दानी (खान०) ।
राजा के समान अत्यंत आनन्द प्राप्त, श्रेष्ठ साहस करने वाला, परोपकारी, सुंदर आमूषण मणि, अच्छे बुरे प्रकार से लाभ करता है (जा० qo) । शुभ कमं कर्ता, शुभ युक्त, अच्छे पुत्र, सुखी, वीर, अभिमानी (ल० चं०) । सुख व बल रहित (qo जा०) । प्रबल प्रताप, घन से प्रसिद्ध (जा० पारि०) । २७ वषं में शस्त्र से भय (हिल्लाज) ।
सेना बल से युक्त, प्रधान सेवक, शूरवीर, बडा प्रतापी, पुत्रवान्, कर्म में उद्योगी, पराजित न होने वाळा, शत्रु से द्रव्य प्राप्ति (जा० सं०)। ४ दशम में बुध का फल
सुर्य सरीखा फल, सुख और बल युक्त (qo जा०) ।
समस्त विद्या ज्ञाता, यशस्वी, धनी, बिनोदी (जा० पारि०) ।
गुरुजनो के साथ हित करने वाला, अपने कमाये घन से घोड़ा खरीदे । घनों से
सावधान, थोड़ा बोले (मान०) 1 :
कोई कार्य करे उसमें सफलता हो, अच्छी विद्या बल बुद्धि और सुख प्राप्त, सत्कर्मी,
सत्य युक्त (फल०) ।
धमी, बड़ा मालसी, मिष्ट भाषी, दयावान् (खान०) ।
ज्ञान में चतुर, श्रेष्ठ कर्म करने वाला, अनेक सम्पत्ति युक्त, राजमान्य, सुन्दर लीलाओं के सहित, वाणी के विलास में श्रेष्ठ (जा० भ०)। |
घन घान्य से युक्त, बहुत भाग्यवान्, नम्रता युक्त, कांति युक्त (ल० चं०) ।
१९ वषं में घन देता है (हिल्लाज) ।
वाक्य समूहों की रचनाओं से युक्त, बुद्धिमान्, धीर, घम में चेष्टा, मालिक के गुण,
अनेक आभरणों से युक्त, मित्र से घन प्राप्ति (जा० go) । ५-दशम में गुरु का फल
अश्व रत्नों से विभूषित घर, नीति गुणों में बुद्धिमान्, सञ्जनों की संगति, दूसरे की
भूमि और स्त्री से रहित, बड़ा धर्मात्मा (मान०) ।
आचरण का सत्य मागं ग्रहण करे, अपने गुणों से प्रसिद्ध, बहुत घनी, राजा का मित्र (फल०) 1
पालकी, जवाहरात, हाथी, घोड़ा युक्त, श्रेष्ठ (खान०) ।
श्रेष्ठ राजा के चिह्नं छत्र चामर आदि और उत्तम वाहनों से युक्त, मित्र, पुत्र,
लक्ष्मी ओर स्त्री के सुख से युक्त, बहुघा यन को वृद्धि (जा० म०) ।
पुण्य, यश, सुख युक्त, राजाओं के बरावर स्वरूप वाला, दयावान् (छ० चं०)।
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