भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

पृष्ठ 354, कुल 418 में से

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३३८ : ज्योतिष-शिक्षा, तुतीय फलित खण्ड

घनवान्‌ (qo जा०) 1 सिद्ध साधु चरित्र, स्वधर्मी, विद्वान्‌, घनो (smo पारि०) ।

१२ वर्ष में घन प्राप्ति (हिल्लाज) ।

शुभ कमे व घन युक्त, कीति, वाहन, सौख्य, घन, गुण, सत्य इनसे युक्त, सिद्ध

किये कमं वाला, चतुर, भ्राता से घन प्राप्ति (जा० सं०) ।

६-दशम शुक्र का फल

भाई बहरा, स्वयं भोगों को भोगने वाला, बन में भी राज्य फल पाने वाला, युद्ध के

योग्य, पुष्ट, सुन्दर शरीर (मान०) ।

अति प्रसिद्ध, मित्रयुक्त, सुख वृत्ति युक्त, स्वामी (फल०) 1

घृष्ट, घनो, पितृ गुरु भक्ठ, विद्वान्‌, मंत्री, वडा आदमी (खान०)।

सौभाग्य ओर सन्मान युक्त, स्नान, पुजन, घ्यान में मन, घनवान्‌, स्त्री पुत्रों में

नित्य प्रेम (जा० भ०) ।

कर्मवान्‌, निधि और रत्नों से युक्त, राजा को सेवा करने वाला, धर्मवान्‌ ओर स्त्रो

का प्यारा (७० <o) । घनवानु (qo जा०) ।

खेती आदि कर्म से, स्त्री से, घन प्राप्त हो, विमु हो (जा० पारि०) ।

१२ वर्ष में सौख्य देता है (हिल्लाज) ।

आज्ञा में कुटिल या स्त्री-घन से युक्त, स्त्री से घन प्राप्ति, वादविवाद में एकत्र किया

मान अर्थ और प्रीति वाला, कीति युक्त, बुद्धिमान्‌, घनो, विख्यात (जा० सं०) à

७-ददाम में शनि का फल

बड़ा धनी, भूतको का अनुरागी, परदेश में जाकर राजा के घर में वास, अभिमानी,

छत्रु से भय नहीं पाता (मान०) ।

राजा का मन्त्री, नीति युक्त, बुद्धिमान्‌, नम्न, श्रेष्ठ ग्राम और नगर के भेद करने

का अधिकारी, चतुर, घन युक्त (जा० qo) 1

कुकर्मी, धन वर्जित, दया सत्य और गुणों से होन, चञ्चल (ल० चं०) ।

सूयंवत्‌ फल, सुखी, बलवान्‌ (qo जा०) । राजा या मन्त्री, सुकृती (खान०) ।

दंड कर्ता, मानो, धनो, निज कुल में वोर (जा० पारि०) .

राजा या मन्त्री हो, कृषि कार्यकर्ता, शुर, प्रसिद्ध (फल०) ।

अनाथ और दुःख युक्त, पुर, ग्राम इनका स्वामी या दंडपति, पंडित, शूरवीर,

घन युक्त, मन्त्रो, चाकर से घन प्राप्त, नीच या दात्रुक्षेत्री--पेवा से इकट्ठा किया घन

बाला, क्रूर, कृपण, पक्षियों को मारने वाला, जंघा में रोग ।

८-दशम में राहु का फल

काम में आतुर, परघन का इच्छुक, सब कामों में अग्रणी, अति हीन,

वैराग्य युक्त, सुख रहित, खेलने में मन, बड़ा चपल, दुष्ट (मान०) ।

प्रसिद्ध, अल्प सन्तान, दुसरे के व्यापार में स्वतः दत्त रहे, कोई सत्कार्य न करे, भय

रहित हो (फल०) 1

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