भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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भिन्न-भिन्न भावों में ग्रहों का फल : ३३९

पिता के सुख को नहीं प्राप्त, स्वतः दुष्ट भाग्य वाळा, वैरियो का नाशक, वाहनों

को रोग, दाता, वात पोड़ा युक्त, वृष या मोन का--सोख्य और कष्ट का भागी (जा० भ०) । ;

बलवान्‌, शत्रु नाशी, कलह प्रिय (खान०) ।

चोरी में निपुण, बुद्धिमान्‌ और उद्धत हो (जा० पारि०) 1

वृंद पुर ग्राम इनका मीत, दंडनायक और पंडित, शूर मंत्री और घनी (जा० सं०) । ९-दशम में केतु का फल

अच्छे कार्य में विघ्न, अपवित्र, बुरे कार्य, तेजस्वी, शुर, प्रसिद्ध (फल०) ।

पिता द्वारा सुख न मिले, स्वयं कुरूप, अनेक कष्टो का पात्र, सवारी के कारण

दुःख । मेष, वृष, कन्या ओर वृद्चिक में--दात्रुनाश (मान०) ।

पिता का सौख्य नहीं, दुष्ट भाग्य, शत्रुनाशक, रोगयुक्त, वाहनों की पीडा, वावरोन ।

कन्या फा--सुख ओर दुःख दोनों का भागो (जा० wo) ।

राहु के समान फल (खान०) ।

विद्वात्‌, वला, शिल्पविद्‌, आत्मज्ञानो, जनानुरागो, विरोध वृद्धि, कलात्मक, वौरो

में श्रेष्ठ, सदा घुभने वाला (जा० पारि०)। .

गुदा में रोग, कफ प्रकृति, म्लेच्छों के समान कर्म, परस्त्रो गामी (जा० सं०) ।

११-लाभ भाव सें ग्रहो का फल

१-लाभ में सूयं का फल :

अत्यन्त घन का भोगी, राजगृह की सेवा करने वाला, भोगों के भोगने से होन,

गुण का ज्ञाता, दुर्बळ अंग, धन से सम्पन्न, कामिनी चित्तहारी, “चंचळ मूर्ति, जाति

अन्धुओं को आनन्द दायक्र (मान०) 1

उन्नति से ही घनी हो, दीर्घजीवी, दुःख रहित, राजा हो (फल०) ।

घनबान्‌, सुन्दर स्त्री, गायन विद्या में चतुर, सर्दार (खान०) ।

गाने में प्रीति, श्रेष्ठ कर्म में प्रवृत्ति, बडा यद्य, -सदा घन से पूर्ण, राजा से नित्य

'बन लाम करे (जा० भ०) ।

अनेक लाभयुक्त, सात्विक, धमंवान्‌, ज्ञानी, ख्यवान्‌ (ल० चं०)।

घनवान्‌ (qo जा०) । ;

विपुल घन स्त्री पुत्र और दास से युक्त (जा० पारि०)।

घन घान्य सुवर्ण आदि से युक्त, रूपवान्‌, कलायुक्त, ज्ञानी, विनीत, गीत में चतुर ।

सुर्य बलवान्‌ अपने षड्वगं में--राजा चोर और पशुओं से घन प्राप्त (जा० सं०) ।

सूर्य योग्यता प्रमाण से गोचर में या अपनी दशा में पदवी, अधिकार, उन्नति, हाथी

घोडे वस्त्र रत्न, मिष्ठान्न, गाय भैस, टांगा आदि वाहन देता है (प्रा० यो०) ।

२-लाभ में चंद्र का फल i

बहुत घन का भोगी, सुखयुक्त, पत्नी तथा मृत्ययुक्त (मान०) 1