भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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भिन्न-भिन्न भावों में ग्रहों का फल : ३४१

अक्षर लिखना, छापाखाना, कोष्टी, बढई आदि का काम, बनिया की दूकान, साहु- कार किवा राजा इनसे घन मिले, बड़ा सल्यत्व हो (प्रा० यो०) ।

शैया मुख हो, इच्छित विद्या सुख, स्त्री का प्यारा, अति गुणी, बुद्धिमान मित्रो का

प्रिय, मंदाग्नि वाला, बली बुध हो तो कूप यज्ञादि का सिद्धि करने वाला (जा० सं०) ।

५-लाभ में गुरु का फल

राजा के समान धनी, अपने कुळ को किसी प्रकार दाग लगाने वाला, सब धर्मों में

निरत, घनवान्‌ (मान०) 1

घनी, भय रहित, अल्प सन्तान, दीर्घ जोवी, वाहन में चछने वाला (फळ०) ।

सन्तोषी, सृशरीर; धनी, विद्वान्‌, पराक्रमी, चतुर (खान०) ।

सामथ्यं युक्त, निश्चय घन लाभ हो, श्रेष्ठ . वस्त्र, उत्तम रत्न और वाहन प्राप्त,

राज कृपा युक्त (जा० भ०) ।

विवेकी, हाथी ओर घोड़ा आदि वाइन और घनयुक्ठ, चंचल, सुखरूप, गुणवान्‌,

(छ० चं०) । लाभवान्‌ (qo जा०) ।

प्रबल बुद्धि, विख्यात नाम, धनी (जा० पारि) ।

राज आशय उत्तम लोगों की सङ्गति, नित्य मिष्ठान्न, नाना प्रकार का वस्त्र,

घान्य पदाथ, खेती, गांव घर आदि प्राप्त (प्रा० यो०) ।

पुत्र सुख, स्त्री सुख, रोगहीन, पराकमी, qg, मंत्रवेत्ता, शास्त्र का ज्ञाता, अल्प￾बिद्या, अल्प सन्तान (जा० सं०)।

६-लाभ में शुक्र का फल

गुणी, अग्नि होत्री, काम देव के समान दिव्य रूप, सुख का पात्र, हास्य में प्रीति, देखने में सुन्दर (मान०) 1

घनो, दूसरी औरतों के साथ रहने का प्रेमी, अनेक सुख (फल०) ।

घनी, तेजस्वी, शहीद, शीलवान्‌ (खान५) 1

श्रेष्ठ, गीत भोर हास्य में प्रीति, नित्य यात्रा की चिता करने वाला, श्रेष्ठ कसं

और धर्म में चित्त (जा० भ०) ।

सदा लाभ, यशी, गुणी, घनी, भोगी, क्रिया में शुद्ध, मनुष्यों में उत्तम (ल० चं०) ।

लाभवान्‌ (go जा०) 1

सुखी, पर स्त्रो रत, घूमने वाळा, धनो (जा० पारि०)।

वेश्या, रानी या नाना प्रकार को त्त्रियो से अनेक लाम, राजा से लाभ, विद्या व

फायदा इनकी परीक्षा पास हो (प्रा० यो०) ।

पुत्र सुख, पालको (वाहन) सुख, स्त्री रूप रत्न से युक्त, श्रेष्ठ रत्नों से युक्त,

स्वस्थ चित्त, शोक हीन, बहुत घन और सेवक (जा० सं०) ।

७-लाभ में शनि का फल

चनवान्‌, विचारवान्‌, भोगी, शोत प्रकृति, सदा प्रसन्न, बड़ा सुशील, बाळपन में

रोगी (मान०) ।

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