भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

पृष्ठ 359, कुल 418 में से

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भिन्न-भिन्न भावों में ग्रहों का फल : ३४२

राजा से प्राप्त घन, कथा वाचकों का विरोधी, कंधे में रोग, अति दुबंल अंग (मा०) ।

पिता का द्वेषी, नेत्र रोगी, पुत्र भौर घन रहित (फल०) ।

वाम नेत्र पीडा, बड़ा खर्चीछा, रोगी, शरारती (खान०) ।

नेत्र के तेज से रहित, पिता से वेर, सबसे विरुद्ध (जा० भ०) ।

रोगी, सत्त्व हीन, वृथा चलने वाळा, असत्य काम में खचं करमे वाला, पुत्र स्त्री

गौर भक्ति हीन (ल० चं०) 1 अपने कर्म से भ्रष्ट (qo जा०) 1

पुत्रवान्‌, व्यंग, सुन्दर, धीर, पतित, और घूमने वाला (जा० पारि० )!

खर्चीला, परस्त्री गामी, व्यसनी, बहुत खर्चीला, राजा से उसका घन हरण

(जा० सं०) ।

२-व्यय में चन्द्र का फल र

दुबेलांग, निरन्तर कफ रोग, क्रोधी, घन रहित 1 स्वक्षेत्री या गुरु क्षेत्री--इन्द्रियों

का दमन कर्ता, बडे दाँत वाला, त्यागी, दुर्बलांग, सुख भोगी, नोच का संग (मान०) ।

दोषी, दुःखी, अपमानित, अति अकमंशील (फल०) । ०)

नेत्र विकार, विरोधी, दुष्ट स्वभाव, दुष्क्रीति; अधिक खर्च (खान०) ।

श्रेष्ठ शील और मित्र रहित, आँखों में विफलता, क्रोधी, शत्रु वृद्धि (जा० पारि०)॥

पाप बुद्धि, बहु भक्षी, हरने वाला, कुल.में अवम, मद्य पोने वाला, विकारी (ल०

चं०) । क्षुद्र ओर अंग हीन (qo जा०) 1

विदेश वासी (जा० पारि०) ।

कृपणता और पद-पद में अविएवास, कृष्ण पक्ष में जन्म हो तो कृपणता -बढ्ती है 1

क्षीण चन्द्र हो--राजा उसका घन हरे । पूर्ण चन्द्र हो शुम दृष्ट हो- घन को वृद्धि

(जा० सं०) ।

३-व्यय में मंगल का फल

पर घन लेने का इच्छुक, चंचल नेत्र, चपल बुद्धि, विहार करने वाला, हास्य करने

वाला, बड़ा प्रचण्ड, सुखी, परस्त्री गामी, गवाही देने वाला, कर्मों से परिपूर्ण (मान०) ।

दोष युक्त नेत्र, क्रूर, स्त्री रहित, चुगल खोर, अघम (फल०) ।

कठोर व कटु यचन भाषी, जालिम, क्रोघी, सदा परेशान (खान०) ।

मित्रों से वर करने वाला, नेन्न रोगी, क्रोधो, शरीर में विफलता, घन का नाशक,

बन्धन का भागी, थोड़ा तेज वाळा (जा० wo) ।

असत्‌ में खर्च करने वाला, नास्तिक, निष्ठुर, मूखं, बहुत वाद वाला, परदेश #

सदा ही जाने वाला (छ० चं०) 1 पतित (qo जा०) 1

विरोधी, घन स्त्री से हीन (जा० पारि०)।

क्रोषी, कामी, अङ्ग हीन, घमं में दूषण कर्ता, प्रिय बन्धुजनो से वैर (जा० सं०) 1

वाम कर्ण में रोग, वाम नेत्र में रोग, स्त्री को अधिक गंगता, कमर में घाव, कषत्रिय |

बगं से घन का खर्च, खोटे कर्म में wq आदि का भय (are सं०) । इन

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