भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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३५० : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

त्रिकेश होने में इनमें अशुभता आ जाती है । इस प्रकार कन्या लग्न में शनि षष्ठश हो

जाता है । इस प्रकार ३-६-८ के स्वामी अशुभ हो जाते Š ।

६-तृतीय में--स्त्रीग्रह हो या तृतीयेश स्त्रीग्रह हो तो अधिक बहन होंगी, यदि

ये पुरुषग्रह हों तो अधिक भाई का सुख हो । स्त्री पुरुष दोनों हो तो भाई बहिन दोनों

का सुख हो! |

७-तृतीय से, भाई साहस यात्रा आदि जाना जाता है परन्तु इनके कारक भिन्न-

“भिन्न हैं जिनसे भिन्न-भिन्न विषय का फल जानना ।

८-तृतोयेश का सम्बन्ध शुभ ग्रहों से हो तो उसके भाई हों। भाइयों के कारक

मंगळ का सम्बन्ध शुभ ग्रहों से हो तो उसके भाई अवदय हों । तृतीयेश और मंगल

साथ-साथ हों तो भाई अवश्य हों । तृतोयेश लग्न में हो लग्नेश तृतीय में हो तो भाई हो ।

` ९-तृतीयेश और मंगल ये पाप ग्रहों के साथ हों ६-८-१२ में हों तो कोई भाई न

हों, होवें तो मर जावेंगे । |

१०-तृतीय भाव में सूर्य हो तो बहुत साहसी हो आगे बढे ।

११-तृतीयेश अष्टम में हो तो यात्रा में मृत्यु हो या आकस्मिक भयानक घटना हो ।

१२-तृतीय में बुध हो और तृतीयेश चन्द्रमा से युक्त हो या भ्रातृ कारक ग्रह शनि

से युक्त हो तो पहिले एक बहिन और पीछे एक भाई हो और तोसरा उत्पन्न होकर

सर जावे ।

१३-यदि मंगल द्वादशेश या गुरु से युक्त और तृतीय भाव में चंद्रहो तो ७

सहोदर हों । न

१४-यदि तीसरे भाव में चन्द्र हो उस पर केवल पुरुष ग्रह ( रवि गुरु मंगल ) की

दृष्टि हो तो बड़े भाई का, शनि हो तो छोटे भाई का, मंगल हो तो अपने से बड़े और छोटे दोनों भाई का नाशक होता है !

इन उपरोक्त योगों में बलाबल देख कर भाई बहिन का शुभाशुभ फल विचारना ।

( भाइयों सम्बन्धी योग पृथक्‌ दिये हैं । )

चतुथ भाव विचार

१-चतुर्थ से घर स्थान सम्पत्ति, माता, वाहन, आनन्द, अपनी उन्नति, शैया सुख, शिक्षा, जल, हृदय, कंधा, गर्दन, कूल्हे आदि का विचार होता है--

इससे स्थावर सम्पत्ति, उपभाग की वस्तुयें, सामान फरनीचर आदि, कई प्रकार के

बाहन, आचरण और स्त्री भोग, भिन्न प्रकार का जल जिसे उपयोग करना पड़ता है, हृदय का बल ओर निबंलता, गर्दन और == की शक्ति इत्यादि बातें प्रगट होती है । यद्यपि इस भाव से भिन्न-भिन्न बातें प्रगट होतो हैं और उस भाव का स्वामी एक होता है परन्तु प्रत्येक बातों के कारक भिन्न ë—

जैसे माता कारक चन्द्र है ( किसी के मत में दिन के जन्म में शुक्र रात के जन्म में चन्द्र माता का अतिरिवत कारक Š । इस कारण माता का सुख, स्वास्थ्य, दोघं जीवन,