सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 367, कुल 418 में से
संदर्भ में पढ़ेंफलित में ग्रहो के फल का गिचार : ३५१
आचरण मातू प्रेम का विचार केवल चोथे भाव से ही नहीं होता परन्तु चन्द्र शुक्र या शनि
से भी होता ë 1 ) ( माता के २ कारक हैं ) जैसी स्थिति हो विचारना ।
इसी प्रकार शिक्षा का कारक गुरु, वाहन ( घोड़ा, मोटर आदि सवारी ) का कारक
शुक्र है । इसी प्रकार .जतुर्थेश और कारक ग्रह की बलवान् स्थिति आदि पर विचार कर
फल कहना ।
२-जब शुक्र अच्छी स्थिति में हो और चतुर्थेश बलवान् हो तो उसे चतुर्थ भाव
की सब चीजों में शुभता प्राप्त होगी । यदि ये बुरे हों या बलहीन हों तो उपरोक्त चीजें
नहीं प्राप्त होंगी ।
३-शुभ ग्रह चतुर्थ में हो या चतुर्थ को देखता हो तो वे सब शुभ ग्रह अपने अधि-
कार प्रमाण से शुम फल देंगे। परन्तु पाप ग्रह उन स्थानों में हों या पाप ग्रह की दृष्टि
हो तो बुरा फल होकर दुःख व चिता उत्पन्न करायेगा ।
४-चतुथे भाव शुभ ग्रह युक्त या दृष्ट हो तो उस भाव की वृद्धि होगी ।
५-चतुर्थ भाव सम्बन्ध से पूर्ण बली ग्रह का पुणे फल होगा । मध्यम वली का
आधा । होन बली या अस्त आदि का बहुत अल्प फल होगा ।
६-चतुथं में सूयं घ शनि हो तो अन्तःकरण सदा उद्विग्न रहे, दुःखी हो ।
चतुर्थं में बुघ शुक्र हो--वहुत करके वह सुखो हो 1 चतुथं में बुध--पंडित हो ।
७-चतुथं में शुभ ग्रह हों या शुभ ग्रह को दृष्टि हो तो उसके पास वाहन रहे !
८-चतुर्थ में शुभ ग्रह हों या उनको दृष्टि हो तो उसकी माता, दीघंजीवी हो ।
९-चतुर्थं में शुभ ग्रह हो तथा चतुर्थेश अपने उच्चादि शुम स्थान में हो, मातृ
कारक ग्रह भी बली हो तो माता से पूर्ण सुख हो 1 घर पशु आदि सम्बन्धी. योग पृथक्
दिये हैं ।
१०-इसी प्रकार चतुर्थेश बी होकर चतुथं में हो तो चतुर्थ भाव सम्बन्धी सब
फल शुभ होता है |
११-यदि चतुर्थेश अस्त नीच गत आदि हो तो उक्त फल विपरीत होता है, अर्थात्
'फल अशुभ होता है।
१२-शुक्र की चन्द्र पर दृष्टि हो या चन्द्र से तीसरे घर में शुक्र हो या शुक्र से
तीसरे घर में चन्द्र हो तो उसके पास कुछ वाहन हो और बहुत सुख प्राप्त करे 1.
१३-स्थावर सम्पत्ति मिलने के योग ।
(१) मंगल चतुर्थ हो या मंगल की दृष्टि चतुर्थ पर हो या चतुर्थेश मंगल के घर में
'हो तो स्थावर सम्पत्ति मिले ।
(२) चतुर्थेश लग्न में हो लग्नेश चतुर्थ में हो । (३) यदि चतुर्थेश का सम्बन्ध किसी प्रकार मंगल से ( मंगल भूमि का कारक है )
हो जावे ।
(४) चतुर्थश घन भाव में हो।