सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 368, कुल 418 में से
संदर्भ में पढ़ें३५२ : ज्योतिष-शिक्षा, तुतीय फलित खण्ड
(५) चतुर्थेश छाभ में हो तो मित्रों द्वारा स्थावर सम्पत्ति मिळे ।
१४-चतुर्थ भाव में चतुर्थेश हो शुभ ग्रहों से दृष्ट हो तो गृह सम्बन्धी सुख
पूर्ण हो ।
१५-लग्नेश शुम ग्रह हो तथा चतुर्थश नीच में हो, चतुर्थ भाव का कारक व्यय
भाव में हो, चतुथे लाभ स्थान में हो तो १२ वषं में वाहनों का सुख हो ।
१६-चतुथे में सूयं शनि, नवम भाव में चन्द्र, तथा लाभ भाव में मंगल हो तो गाय
भैंस आदि पशुओं का लाम हो ।
(५) पंचम भाव का फल विचार
१-पंचम स्थान से--सन्तान, बुद्धि, अकल्पित घन ( सट्टा लाटरी आदि से ) स्मरण
शक्ति, देवता, विद्या, ज्ञान, वाणी, मंत्रणा शक्ति, सलाह देने की शक्ति, यांत्रिक शक्ति,
बुद्धि. हषं, मानसिक प्रगल्भता, राज्य द्वारा लाभ आदि का विचार होता है परन्तु इनके
कारक भिन्न-भिन्न हैं ।
२-बुद्धि का कारक बुधग्रह है ओर मन का द्योतक चन्द्र है इससे किसी का ज्ञान
निश्चय करने में इनका विचार होता है । किसी ने विद्या ऊंची पढ़ी पर ज्ञान कम होता
है इससे विद्या ओर ज्ञान में अन्तर है ।
३-चन्द्र पंचम भाव में हो उसे शुक्र देखता हो तो उसे अचानक द्रव्य प्राप्त हो
लाटरी आदि किसी प्रकार से प्राप्त हो सकता है |
४-पंचमेश शुभग्रह युक्त हो या शुमग्नह के घर में हो तो वह बुद्धिमान् और शु
आचरण वाला होता ë ।
५-पंचमेश जिस भाव में हो उस राशि का स्वामी शुभग्रहों से दुष्ट हो या दोनों
बाजू शुभग्रह हों तो तेज बुद्धि हो ।
६-पचम में शनि और राहु हो और पंचम पर शुभग्रह की दृष्टि न हो पंचमेश
पर पापग्रहों को दृष्टि हो तो उसकी स्मरण शक्ति बहुत कम हो।
७-पंचम का सम्बन्ध स्त्रीग्रह से हो तो स्त्री देवता जैसे सरस्वती दुर्गा आदि का
पूजन करे यदि पुरुष ग्रह से सम्बन्ध हो तो पुरुष देवता राम कृष्ण शिव आदि की पूजा करे ।
८-पंचमेश सप्तम में हो तो चोरों द्वारा धन की हानि हो 1
९-पंचम में गुरु शुक्र बुध हो ओर योग या दृष्टि द्वारा कोई शुभग्रह गुरु शुक्र या
बुघ से हो तो सन्तान होगी ।
१०-पंचमेश पंचम में हो तो कई सन्तान हों ।
११-पंचम ओर पंचमेश का कोई सम्बन्ध शुभग्रह से हो तो उसकी सन्तान की संख्या में वृद्धि हो ।
१२-पंचम ओर पंचमेश का सम्बन्ध पापग्रह से हो तो सन्तान की हानि हो । १३-पंचम में २-३ पापग्रह हों और पञ्चम पर छत्रु ग्रह की दृष्टि हो तो कोई सन्तान न हों यदि होवें तो जीवित न रहें ।