सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 369, कुल 418 में से
संदर्भ में पढ़ेंफलित में ग्रहों के फल का विचार : ३५३
१४--पंचमेश अष्टम में हो तो सन्तान की हानि हो । १५--पुत्र या कन्या-पंचम या पंचमेश का सः म्बन्ध स्त्री ग्रह से हो तो पुरुष ग्रह से हो तो पुत्र हो । SN NN १६ संतान को कोति ओर मान-पंचमेश् दशम में हो तो उस के संतान को कोति और सान मिले ।
१७--पुत्र विचार-पंचम से, पुत्र कारक ग्रह और गुरु को स्थिति पर विचार कर संतान होना निर्णय कर । भावेश पुरुष या स्त्री ग्रह जैसा हो उससे पुत्र-पुत्रो का विचार करना ।
१८ दत्तक या कृत्रिम पुत्र-पंचम में ३, ६, १० या ११ राशि हो उसमें शनि, मांदि, गुलिक हो तो दत्तक या कृत्रिम आदि पुत्र होता है । १९--एक पुत्र हो-शनि से पंचम में गुरु या गुरु से पंचम में शनि तथा पंचम भाव पाप युक्त हो तो १ पुत्र होगा । š
२०--७ पुत्र-पंचम से पंचम में शनि हो । पंचमेश पंचम में हो तो ७ पुत्र हों दो sf दो दो पुत्र होते हुँ ।
२१--८ पुत्र-गुरु ५ या ९ भाव में हो, पंचमेश बलो हो, ढितोयेश दशम में हो तो ८ पृत्र होंगे ।
२२--९ पृत्र-गुरु “अच्छे स्थान में हो, द्वितीयेश राहु युक्त हो । भाग्येश भाग्य स्थान में हो तो ९ पुत्र हो ।
२३--दुसरी या तीसरी स्त्री से पुत्र-पंचम में पाप ग्रह हो या गुरु से पंचम में शनि हो तो पुरुष की प्रथम स्त्री से पुत्र नहीं होता, दूसरी या तीसरी स्त्रीरे पुत्र होता है । २४--४० वर्ष में पुत्र-लग्न से नवम में गुरु हो गुरु से नवम में शुक्र हो या लरनेश शुक्र हो तो ४० वर्ष में पुत्र हो ।
२५-- एक पुत्र होकर मरे-पंचम माव पापयुक्त हो । गुरु से पंचम शनि हो ।
लग्नेश द्वितीय भाव में हो और पंचमेश पाप युक्त हो तो एक पुत्र होकर नष्ट हो
जाता ë ।
२६---३३-३६ वर्ष में पुत्र मरण-पंचम से ओर लग्न से. पंचम भाव में पाप ग्रह
` हो तो ३३ या ३६ वर्ष में पुत्र का मरण हो ।
२७--५६ वर्ष में पुत्र शोक-छरन में गुलिक हो ओर लग्नेश अपने नीच में हो तो,
५६ वर्ष में पुत्र मरण 1
२८--पेट में पीड़ा-पंचम में शनि पाप दृष्ट हो तो पेट में पीड़ा हो लोह या अग्नि
से पोड़ा हो ।
(पुत्र सम्बन्धी योग पृथक् दिये हैं। )
भाव का फल
जे भाव से रोग, शत्रु, ऋण, माया, चोट, नौकर आदि का विचार होता ë ।
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