भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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३५४ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

२- शत्रु या ऋण हानि-छठे घर में पाप ग्रह हो तो शत्रु की हानि हो और कोई

ऋण न रहे ।

३-- म बल-षष्ठेश पष्ठ भाव में हो वीर्यवान्‌ होया शुभ होतो षष्ठ भाव

सम्बन्धी सब फल शुभ होगा । या छठे भाव में शुभ ग्रह की राशि हो शुभ युक्त हो, शुभ

ग्रहों से दुष्ट हो तो उस भाव का फल शुभ होगा । पष्ठ में गुरु बलवान्‌ हो तो शुभ होगा।

जन्म में या प्रश्‍न में भी इस योग पर विचारना ।

४--अशुभ फल-यदि पापयुवत पापदृष्ट भाव राशि हो तो शुभ नहीं होगा।

५-—-सिद्वि-ष्ठ में स्वक्षेत्री शुक्र हो तो सदा अति सिद्ध हो ।

६--अच्छे नौकर-षष्ठेश छठे भाव में हो तो अच्छे नौकर हों ।

७--पूर्वज की जायदाद की हानि-षष्ठेश चतुर्थ में हो तो अपने पूर्वजों की जायदाद

की हानि हो उनकी कोई जायदाद न मिले ।

८--ऐक्सीडेन्ट या आपरेशन-छठे घर का सम्बन्ध मंगळ से हो तो अचानक अप

घात ( ऐक्सीडेन्ट ) या शस्त्र क्रिया द्वारा चिकित्सा अर्थात्‌ आपरेशन हो ।

९--बीमारो से आराम-छठे भाव का सम्बन्ध गुरु से हो तो बीमारी हो उससे शीक्रष

झाराम पावे ।

१०--कुविचार से रोग-छठे भाव का सम्बन्ध शुक्र से हो तो उसे भोजन या रहन- सहन के सम्बन्ध में कुविचार से रोग हो।

११- पेट दर्द-छठे भाव का सम्बन्ध शनि से हो तो पेट दर्द या अपच का रोग रहे ।

१२- बीमारी या नोकरों द्वारा घन हानि-पष्ठेश धन आव में हो तो रोध हारा

या नोकरों द्वारा धन की हानि हो ।

१३--सूजन और क्षय रोग-षष्ठ में सूर्य युक्त चंद्र हो तो शरीर में सूजन हो और

क्षय रोग हो ।

१४-सदा रोगी-छठे में शुभ ग्रह हों तो सदा रोग हो ।

१५-मृत्यु-छःे में चन्द्रमा हो तो मृत्यु दायक है।

१६--दोष कारक ग्रह-षष्ठ में सूयं हो--दश दोष देता है, षष्ठ में चन्द्र हो--हजार

दोष देता हैं, षष्ठ में मंगल, शनि--कुछ दोष नहीं देते, षष्ठ में शेष ग्र ह--चन्द्र के

समान हजार दोष देते हूँ ।

७--सप्तम भाव का फल

१-सप्तम से स्त्री का सब प्रकार का विचार होता है । स्त्री की सुन्दरता, स्वभाव,

विवाह, घन आदि । वाणिज्य द्वारा लाम का भी विचार होता है ।

२---सप्तम माव, सप्तमेश और इसका कारक ग्रह शुक्र ओर सप्तमस्थग्रह से भाव

फल विचारना ।

३- खूप गुण आदि का विचार--सप्तम स्थित ग्रहों के शीळ, भावादि राशि शीळ

'लग्नादि के अनुसार सब विचार कर अर्थात्‌ उपरोक्त सब ग्रहों ओर राशि के गुण घमं