भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

पृष्ठ 371, कुल 418 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 371

फलित में ग्रहो के फल का विचार : ३५५

ओर कुडलो में ग्रह स्थिति विचार कर स्त्री के गुण रूप स्वभाव आदि जाने ।

whe ४-सुन्दर स्त्रो-पप्तमेश पडचल सहित शुभमाव हित शुभमाव युक्त यदि शुभग्रह से युक्त दुष्ट हो

५-सप्तम भाव का फल-सप्तमेश दुष्ट स्थान में हो पापदृष्ट हो या पापयुक्त हो तो

सप्तम भाव का फल मध्यम होता है । ऐसा न हो तो शुभ फल होता ë ।

६-अच्छा फल-यदि छर्न से या चंद्र से ५ वाँ या ७ वाँ घर ९ वें घर के स्वामी से

युक्त या दृष्ट हो तो दोनों भाव के लिये शुभ है अन्यथा नहीं 1

सप्तम में शुभ राशि शुभग्रह से दुष्ट युक्त होने से भावफल शुभ होता हे । पाप

राशि पाप दृष्टि योग से अशुभ फल होता ë ।

७-माग्यवान्‌ स्त्री-मप्तम का कोई सम्बन्ध सूर्य से हो तो भाग्यवती स्त्री मिले वह

अच्छे आचरण को होगो । विवाह के बाद जातक की उन्नति होगी ।

८-उद्योगो ईमानदार स्त्री, विवाह में देर-सप्तम का कोई सम्बन्ध शनि से हो तो

बिवाह देर से हो, परन्तु उसको स्त्री ईमानदार और उद्योगो होगी । कमी-कमी कड़े

स्वभाव की होगी ।

९-बुद्धिमान्‌ तेज स्त्री-सप्तम का कोई सम्बन्ध बुध से हो तो स्त्री तेज होगी ओर

बुद्धिमान्‌ होगी ।

१०-स्त्री द्वारा सुख-विवाह के बाद उन्नति-सप्तम का कोई सम्बन्ध गुर सेहोतो

स्त्री द्वारा सुख मिले ओर विवाह फे पश्चात्‌ उन्नति हो 1 या विवाह कारक शुक्र सिह

š हो तो विवाह के पश्चात्‌ जीवन में उन्नति हो 1

११-स्त्री के कारण सुख व घन-सप्तम का कोई सम्बन्ध शुक्र से हो तो स्त्री द्वारा

सुन्न हो और कुछ घन छाम भी हो । š

१२-२-३ अवसर चूकने पर विवाह-सप्तम का कोई सम्बन्ध चन्द्र से हो तो २-३

अवसर चुकले के पश्चात्‌ विवाह हो सकेगा ।

१३-स्त्री स्वेच्छाचारी-सप्तम का कोई सम्बन्ध मंगळ से हो तो स्त्री के कारण

विपत्ति आवे । स्त्रो क्रोधी हो पति को इच्छानुसार न चले ।

१४-स्त्री के कारण दुःख व झगड़ा-सप्तम या सप्तमेंश का कोई सम्बन्ध मंगल से

हो तो स्त्री से झगड़ा हो । कभी-कभो स्त्रो के द्वारा दुःख मी हो ।

१५--विलम्ब मे विवाह-शनि के घर में शुक्र हो और सप्तम या सप्तमेश से शनि

या सूर्य का कोई सम्बन्ध हो तो जीवन में बहुत विलम्ब से विवाह ह्रो।

१६--एक से अधिक विवाह-यदि २-७-९ भाव के स्वाभियों में से किसो का ओर

शुक्र का कोई सम्बन्ध पाप ग्रह या शुभ ग्रह से हो तो एक से अधिक विवाह होगा ।

१७--स्त्रो आचरण होन-सप्तमेश पाप ग्रह के साथ हो या पाप ग्रह को दृष्टि हो

तो स्त्रा वदचलन हागी ।

१८--स्त्रो कामी,एक या अधिक से प्रेम-शुक्र ग्रह मंगल के घर में हो और मंगळ