सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 372, कुल 418 में से
संदर्भ में पढ़ें३५६ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
शुक्र के घर में हो या मंगल या शुक्र साथ-साथ किसी घर में हों तो स्त्रो एक या अधिक से प्रेम करे 1
१९--स्त्रो गर्व युक्त-सप्तम में नीच राशि का शुक्रहो । या चंद्र गुरु शुक्त इनकी
राशि सप्तम में हो और शुक्र और मंगल की दृष्टि हो तो स्त्री गव युक्त होगो ।
२०--स्त्री नपु सक-सप्तम में नपु सक ग्रह हो तो स्त्री में नपुंसकता रहे!
२१--स्ती फल विचार-जन्म में जिस प्रकार पुरुष का फल कहा है वह फछ स्त्रियों को भी लागु हाता है । स्त्री के सप्तम से उसके पति का विचार होता है । दूसरे भाव फळ में पुरुष के स्थान में स्त्री समझना स्त्रियों की जन्म कुण्डली से विशेष अन्तर स्त्री
जातक में दिया रहता है वह भी आगे दिया गया है 1
(स्त्री सम्बन्धी योग पृथक दिये हैं 1)
अष्टम भाव का फल
१--यह आयु या मृत्यु स्थान है। इससे मृत्यु का निदान, मृत्यु सम्बन्धी सव प्रकार का विचार, दहेज अर्थात् स्त्री द्वारा घन प्राप्ति व अकल्पित लाभ (सट्टा छाटरी आदि द्वारा) का विचार होता है ।
२--कौन विकार से मरण-इस स्थान पर कोई ग्रह न हो तो जिन ग्रहों की दुष्ट हो उनमें जो बलवान् हो उसके अनुसार वात पित्त कफ आदि व्याधि से भरण होगा 1 जसे रवि से पित्त, चन्द्र से इटेष्म, भोम से पित्त इत्यादि ।
३--किस अंग में होपा-काळ पुरुष का जो अंग अष्टम राशि में है उस अंग मे उपरोक्त व्याधि होकर मृत्यु हो।
'४--माव फळ शुभ-अष्टम भाव में शुभ ग्रह की राशि शुभ फळ देती है! ५--धन भाव के सद्दा इसका भी विचार-जैसा घन भाव गत ग्रहों के फूल कहें हुँ वैसा अष्टम भावगत ग्रहों का भी विचारना । जैसे क्रूर ग्रह अष्टम में हो तो मनुष्य रोग युक्त रहे, युद्ध में मरे, बहुत काल तक कलह रहे 1 किला एका-एकी न टूटे 1 बन्धन घें पड़ा शीघ्र छूटे। भार से छदी नाव सुख पुर्वक पार लगे । ऐसा ही फल द्वितीय भाव में कूर ग्रह का है ।
६--अष्टमेश का अशुभत्व-अष्टम भावेश जिस घर में हो उस भाव के फल को नष्ट करता है । . जंसे अष्टमेश घन भाव में हो तो घन को हानि, पंचम में हो तो संतान नाश, सप्तम में हो तो स्त्रो की हानि इत्यादि । ७--घन विचार-शुभ ग्रह अष्टम में हो तो सदा घन रहित रहता ë यदि वहाँ क्रूर ग्रह हो तो घन की हानि करता है ।
८_ पर्वत से गिरकर मृत्यु-सुय और मंगल क्रम से १० और ४ स्थानों में हों तो पर्वत से गिरकर मृत्यु हो ।
९ कप में गिरकर मृत्यु-शनि चढ्न और मंगळ क्रम से ४-७-१० स्थान में होतो ` कूप में गिरकर मृत्यु हो ।