भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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फलित में ग्रहो के फल का विचार : ३५७

१०--अपने जन से मृत्यु-सुर्य चंद्र यदि कन्यागत क्रूर ग्रहों से दृष्ट हों तो अपने जन से मृत्यु हो 1

११--जल में डूबकर मृत्यु-द्विस्वमाव राशि में सूर्य चंद्र स्थित हों तो जल में डूबकर मृत्यु हो । (मृत्यु सम्बन्धी विषय पृथक्‌ दिया है 1)

६-नवम भाव का फल

६--नवम भाव से घमं, श्रद्धा, तप, तीर्थयात्रा, भाग्योदय, दूर की यात्रा, जल की यात्रा, ग्रन्य कर्तंव्यता, बुद्धिमत्ता आदि का विचार होता है 1

२--नवम भाव अपने स्वामी से युक्त एवं शुभ ग्रह युक्त दृष्ट हो तो उस भाव का

फ़ळ अच्छा होता है अन्य प्रकार से अशुम फल होता है ।

३--इस भाव से सम्पूर्ण भाग्य का फल विचारना । नवमेश, नवम भाव, नवम

स्थित ग्रह इनवा नवां वर्ग जैसा सबल या निबंल, शुभ या अशुभ हो उसके अनुसार

फल विचारना 1 नवमेश जैसा बली या निबँल होकर शुभ या अणुभ स्थान में हो वैसा

शुभ या मध्यम वा हीन भाग्य कहना । सबसे पहिले भाग्य का ही विचार करना क्योंकि

भाग्य बिना कुछ न होगा ।

४--लरन से ओर चंद्र से दोनों प्रकार के नवम स्थान से फल विचारना । दोनों

में अच्छा हो तो श्रेष्ठ फल होगा यदि एक प्रकार से अच्छा हो तो आघा फल समझना ।

५--लग्न से प्रथम और नवम भाव भी धन संज्ञक हैं इससे भी घन का विचार

करना ।

६--पिता आदि की मृत्यु का विचार-पंचम या नवम में पाप ग्रह की राशि में

यदि-सूर्य हो तो-पिता की मृत्यु हो, मंगल हो तो-भाई की मृत्यु, बुघ हो तो-

आमा की मृत्यु हो, गुरु हो तो--नानी को मृत्यु हो, शुक्र हो तो--नाना की मृत्यु हो,

शनि हो तो--स्वयं जातक को कष्ट या मृत्यु ।

७--राजा हो-नवम में चन्द्र हो बुध या मंगल से दृष्ट हो तो राजा हो या नवम

में चन्द्र उच्च का हो शुभ ग्रह से दुष्ट हो तो राजा हो ।

८- सूर्यं से दुष्ट--राजा, मंगल से दृष्ट--मंत्री, बुध से दृष्ट--घनवान्‌, शुक्र से

दृष्ट--अद्वपति, सूर्य चन्द्र से दृष्ट--विद्वान्‌, पशु पालक, सूय मंगल से दृष्ट- सेनापति,

रत्न व्यापारी, सूर्यं बुध से दृष्ट--घनी, विनोदी, सूर्य शुक्र से दृष्ट--नम्नता युक्त, सूर्य

शनि से दृष्ट--गुणवान्‌ राजा ।

९--चन्द्र सूर्य दोनों से दृष्ट-विख्यात, राज तुल्य पाडत, बहुत स्त्री युक्त, दीर्घायु ।

चन्द्र मंगल दोनों से--सौख्य ऐश्वयं युक्त सेना का अधिकारी या मन्त्री । चन्द्र दुब

दोनों से--गृह शयन अन्न आदि भोगी, तेजस्वी, क्षमाशील, बुद्धिमान्‌ । चन्द्र शुक्र दोनों

से- शुमाकार, कमं युक्त, शुरवीर, सम्पन्न, परिवार युक्त । चन्द्र शनि दोनों से-गुण

वाळा और राजलुल्य, विदेश में पंडित ।