भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

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फलित में ग्रहों के फल का विचार : ३५९

संग्रहणी कुष्ठ आदि रोग से घन नाश, क्र्र वृत्ति करता ë ।

शानि--मंगल के अनुसार ।

बुघ उच्च का--अध्यापक के कार्य से लाभ ।

बुध शत्रुगृही--मुकदमा द्वारा, किसी से लाम ।

बुघ मित्रगृही--लेखक कायं, शिल्प कायं, वस्त्र, स्वर्ण, घनी स्त्री से लाम ।

बुघ अति शत्रू, राशि--विद्या हीन, व्यापार हानि, कुष्ट तया पथरी रोग ।

स्वषोड़शांश में--बन्धु विवाद से, नौकरी से कुशलता तथा घन धान्य आदिका

लाभ ।

गुरु उच्च का या स्ववगं में--प्रतापी, गुणी, घनी, किसी संस्था का प्रधान ।

गुरु उच्च का शत्रुराशि में--द्रव्य नाश, पराजय ।

गुरु मित्रगृही राशि में--अध्यापक ।

गुरु भतिमित्रगृही--पुत्र स्त्री मित्रादि एवं विवाह सम्वन्धी कार्य से छाम ।

शुक्र उच्च का स्ववर्ग का--राज कार्य, सेनाध्यक्ष, मंत्री, शिक्षा सम्बन्धी कार्य, यज्ञ

कार्य से लाभ ।

स्वगृही हो -नोकरो से, सेनाधिकारी, कृषि और विद्या से, जलाशय से लाम ।

१०-दशम भाव का फल

१--यह कमं स्थान है अच्छा बुरा कर्म, घंघा, नौकरी, अधिकार, सन्मान, मान्यता,

हाथ का किया कमं, कीर्ति, पितृ सुख, यज्ञ आदि का इससे विचार होता है।

२--चतुर्थ और दशम भाव भी सुख संज्ञक ë!

३--सत्कर्मी प्रसिद्ध दीघंजीवी आदि-दशम में शुभ ग्रह हों और दशमेश पूर्ण बली

होकर केन्द्र या कोण में हो और अपने स्वस्थान या उच्च में हो या लग्नेश दशम में हो

तो उसका सब मान करे, अति प्रसिद्ध हो सदा सत्कर्म करने की ओर झुकाव रहे, राजा

सदृश भाग्य हो और दीर्घजीवी हो ।

४--शुभ कर्मी क्रूर कर्मी-दक्षम में qa ग्रह हो तो वह भलाई युक्त कुछ शुभ कार्य

करेगा । यदि शनि राहु या केतु हो तो वह पाप युक्त और क्रूर कर्म करेगा ।

५--दरिद्र-दशम में कोई qg न हो तो दरिद्र दोष होता है ।

६- प्रतापी बैयंवान्‌-यदि दशमेश सुस्थित हो तो वह अपने प्रताप और बाहुबल से

धमं युक्त कायं पूरा करने में समर्थ होगा 1

७--लोक प्रिय महत्वशील-दशम में सूर्य या मंगल हो तो वह बडा ओर महत्त्व का

पुरुष होता है जो संबको प्रिय हो ।

८--इस प्रकार दशमस्य राशि ग्रह व दशमेश और ग्रहों की दृष्टि स्वभाव बल

आदि पर विचार कर दशम भाव सम्बन्धी समस्त बातों को उनके कारक पर से

बिचारना ।