सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें३६० : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
११--लाभ स्थान का फल
१--इससे अनेक प्रकार के लाभ, द्रव्य लाभ, आशा, इच्छा, हाथी घोड़े आदि वाहन का ऐदवयं, मित्र व मित्र सुख का विचार होता है। विशेष कर इससे लाथ और घन संग्रह का विचार होता है 1
२--अत्यन्त छाभ-ऊ़म्नेश्ञ यदि स्वोच्च, स्वक्षेत्री, मित्र गृही, मूल जरिकोणगत, राज्य कारक, भाग्य कारक ग्रहों से दृष्ट हो तो अत्यन्त लाम हो । वैना q वृद्धि-बलवान् लग्नेश शुभ ग्रहों से युक्त या दृष्ट हो तो आताओं की वृद्धि होती है । नोच, अस्तगत, दुःस्थान स्थित होकर क्रूर ग्रहों से संयुक्त हो तो भ्रातू फा अभाव जानना। इससे भाव फल को हानि होती ë! ४--३-६-११ भाव में पाप ग्रह ( सूर्य मंगल शनि राहु केतु या पाप युक्त वुध और क्षोण चंद्र ) हो तो अच्छे होते हैं और अच्छा फल देते हँ । इससे ११ भाव का अच्छा फळ कहा है । यदि लग्नेश पाप युक्त या बुरे वर्ग में हो तो उसको मलाई करने की शक्ति कम हो जातो है परन्तु पाप ग्रह और शुभ ग्रह भी लाभ भाव में बलवान् होते हैं । ५--उचित या अनुचित रोति से घनोपार्जन-छाभ भाव में पाप ग्रह हो तो अनुचित रीति से यदि शुम ग्रह हो तो उचित और ईमानदारी से घन उपाज॑न करेगा । ६--शुभ फल-लग्नेश शुभग्रह हो वढी ग्रह हो या लाभ में शुभ ग्रह या बलो ग्रह हो तो भावोक्त फल शुभ होते ë!
नीच राशि, शत्रु राशि, नीच नवांश, शत्रु नवांश में स्थित ग्रह अच्छा फल नहीं देता । अपने अपने षडवर्ग बल से युक्त ग्रह लाम में हों या शुभ ग्रहों के षड़वग में हों या शुभ ग्रह से युक्त दुष्ट हों तो अति लाम होता है 1 ७--राजा हो-एक भी ग्रह षडवगं युद्ध होकर समस्त ग्रहों से दृष्ट हो तो राजा हो।
८-किस प्रकार लाम होगा-छाम भाव में जैसे वर्ण वाला ग्रह हो उस वर्ण के समान वस्तु का उस वर्ण के समान मित्रो आदि द्वारा लाभ, घन तथा सुख होगा । ९--संतान का विचार-पंचम भाव के अनुसार ळाम भाव से भी निश्चय पूर्वक कन्या सन्तान, मृत सन्तान, निःसन्तान या पुत्र नाश इन सब बातों का विचार होता है । अर्थात् पंचम भाव में जो फळ का विचार होता है इससे मी वही विचारना । १०--चाहन युक्त राज्य लाम-लाम भाव में बैठे सब ग्रह राज्य लाम का भी फल देते हैं । यदि लाभ में शुभ ग्रह हो तो उसके यहाँ हाथो घोड़ों आदि को कतार लगी रहे सदा अच्छे काम करने को इच्छा रहे । ११-छाम भाव में ये ग्रह हों या इनको दृष्टि हो या इनका षडवगे हो तो फल-- सूर्य--राजा से या चोरों के कुल से या मुकदमा में किसो को डिगरो आदि फराने से या चोपाये पशुओं द्वारा बहुत प्रकार घन प्राप्ति gt