भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

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३६२ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतोय फलित खण्ड

पुरुष या स्त्री सम्बन्धी खचं--व्यय में पुरुष ग्रह हो तो पुरुष सम्बन्धी कार्य में, यदि

स्त्री ग्रह हो तो स्त्री सम्वन्धी कार्य में खच होगा ।

शुभ या अशुभ कार्य में ख्च--व्यय में शुभग्रह हो, व्ययेश शुभ युक्त या शुभ दृष्ट

हो तो शुभ काम में खर्च, यदि पापयुक्त पापदृष्ट हो तो अशुभ काम में खर्च होगा ।

किस सम्बन्ध में खचं--व्ययेश जिस भाव में हो तथा जिस-जिस भाव पर दृष्टि

डालता हो उसी भाव सम्बन्धी खचं होगा ।

कंजुस--व्ययेश लाभ में हो तो कृपण हो ।

मुक्ति या अन्धकार--व्यय में शुभग्रह हो या शुभ की दृष्टि हो तो मुक्ति प्राप्त फरे

या पापयुक्त या पापदृष्टि हो मृत्यु के बाद अन्धकार में प्रवेश करे ।

मृत्यु सम्बन्धी खर्च--अष्टमेश व्ययेश के योग से मृत्यु सम्बन्धी खच होगा ।

तीथं में खचं--नवम में शुभग्रह हो व्ययेश की दृष्टि और लग्नेश की दृष्टि या युति

हो तो तीथंयात्रा विषयक खचं होगा ।

घन संग्रह--व्यय में पूर्ण बली चन्द्र बुध गुरु और शुक्र में से कोई हो तो घन संचय

की व्यवस्था करते हैँ ।

घननाश--व्यय में शनि हो मंगल से युत या दृष्ट हो तो घन नष्ट हो ।

राजा का धन हो--व्यय में सूयं या क्षीण ga दोनों हों, या मंगल से दृष्ट हो

तो उसका घन राजा छुड़ा लेवे ।

शत्रु या रोग में खचं--पष्ठेश और व्ययेश का पुत्र माता पिता भाई आदि के

कारक ग्रहों या भावों से सम्बन्ध हो ठो शत्रु या रोग द्वारा खचे हो ।

पुत्र कार्य विद्या आदि में खचं--पंचमेंश, व्ययेश, लग्नेश और गुरु का शुभ सम्बन्ध

होने से पुत्र कायं या विद्या कार्य, परोपकार या घामिक कार्यों में खर्च हो ।

नेत्र कष्ट--व्यय में सूर्य शुक्र लग्नेश इनमें २ या ३ ग्रह हों तो नेत्र में रोग हो ।

बीमारी में खर्चं- अष्टमेश ब्यय में हो तो बीमारी अच्छी करने में खर्च हो ।

वाणी से अपकीति--व्यय में बुध हो तो अपनी वाणी के कारण अपकीति हो ।

बड़प्पन या सरकारी काम में खर्चे--दशमेश व्यय में हो तो सरकारी काम में या

अपने बड़प्पन में पैसा खच करे ।

असावधानी से अड़चन--अ्यय में मंगल हो तो बहुत सावधानी से कोई काम या व्यापार करना चाहिए नहीं तो असावधानो होने से अड्चन में फंस जाना पड़ेगा 1

वाहन में खर्च--जिस प्रकार चौथे भाव से वाहन का विचार होता है वे योग व्यय भाव से भी विचारना । वाहन योग होने से वाहन में खर्च होगा ।

दुष्ट स्वभाव- व्यय में सूर्यादि पापप्रह हों तो उसका दुष्ट स्वभाव हो, दुःखभोण अधिक खर्च करे । नेत्र विकार हो ।