सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 390, कुल 418 में से
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३७४ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
दुष्ट हो.तो घन वृद्धि । अपनी राशि को छोड़ कर अन्य राशि में हो, चन्द्रमा क्षीण हो,
पाप से युक्त व दृष्ट हो तो घन हरण हो 1 (जातकसार) ।
घनी, गौरव युक्त, दो या. अधिक स्त्री कितु पुत्र हीन (qo पा०) 1
३--तृतीय में घनेश-माई बंदो से भेद भाव रहित, यह शुभ. ग्रह हो तो राजा से
चैमनस्य हो 1 घनेश मंगल हो तो अवश्य चोर हो ( मान० ) । व्यवसाय रखने वाला,
कलह कर्ता, बल होन, चोर तथा चंचल घन वाला, विनय तथा न्याय से हीन ( जा?
सं० ) । शुभ ग्रह से युक्त हो तो पराक्रमी, बुद्धिमान्, गुणी, कामी, लोभी । पापयुक्त हो
तो देवनिदक ( नास्तिक ) हो (qo पा०) ।
४--चतुर्थ में घनेश-पिता द्वारा पूर्ण लाभ, वक्ता, प्राणियों पर दया भाव,
दीर्घायु। घनेश क्रूर ग्रह हो तो मृत्यु देवे ( मान० ) 1 पिता से लाभ, उद्योग कर्ता,
दीर्घायु । पाप ग्रह हो तो मरण ( जा० सं० ) । सब सम्पत्ति से युवत । यदि गुरु से युदत
या अपने उच्च में हो तो राजा या राजा तुल्य हो (बु०्पा०)। .
५--पंचम में घनेश-पुत्र प्रफुल्लित, कठिन से कठिन काये करने में प्रसिद्ध, गति
छुपण, दुःख का भोगी ( मान० ) । सदा विलासी, नेत्रो से युक्त, कठिन कायं में वर्तमान, विख्यात, कृपण और दुःख नाशक ( जा० सं० )। धनी, पुत्र भी घनोपाजंन करने बाळा ( वु० पा० )
६--षष्ठ में घनेश-धन संग्रह करने में तत्पर, शत्रओं को मारने वाला । घचेल
हो तो भूमि फा छाम हो, पापग्रह हो तो घन हीन करे (सान०) 1 घन संग्रह
करने में निपुण, कृतघ्न, पृथ्वी का स्वामी (जा० सं०) । शुभग्रह से युक्त हो तो शत्रु से
घन लाम । पाप युक्त हो तो शत्रु के द्वारा हानि तथा कमजोर जांघ वाला (go पा०)॥
` ७--सप्तम में घनेश--बड़े गौरव. युक्त किसो कार्य को करे । श्रेष्ठ गुगवती, धन
संग्रह करने वाली, क्रीडा करने वाली स्त्री मिळे, क्रूर ग्रह हो तो स्त्री वंध्या हो (मान०) ॥
रेष्ठ स्त्री के साथ भोग विलास, धन संग्रह करने वाली स्त्री हो, पापग्रह हो तो स्त्री
बंघ्या हो (जा० सं०) । परस्त्री गामी, वंद्य । पाप योग या दृष्टि हो तो स्त्री व्यभि-
हो । (qo पा० . ८-अष्टम में धनेश-अष्टकपाली अर्थात् मुर्दा की खोपड़ी लेकर भीख मांगने वाला,
धात्मघात करने वाळा, इच्छा प्राप्त वस्तुओं की भोगने वाला, विलासी, दूसरे के घन को चुराने वाला, हिसक, भविष्य को मुख्य मानने वाळा (मान०) । थोड़ा कलह
वाला, आत्मघाती, उत्पन्न हुए भोग भोगने वाला, विलासी, हिंसक, सदा प्रारव्घवदय (जा० सं०) । बहुत भूमि और घन से युक्त हो । स्त्रो सुख अल्प, बड़े भाई से
सुख नहीं होता (qo पा०) । सट्टा लाटरी, वसीयत नामा आदि से अकल्पित लाभ 1 ९--नवम में.धनेश-दानो, क्रूर ग्रह हो तो दरिद्रो, भिक्षुक, प्रत्येक कार्य में उपहास
प्राप्त (मान०) । शुभ ग्रह हो तो विख्यात दानो। पाप ग्रह हो तो दरिद्र, भिक्षुक तथा ठग (जा० सं०) 1 घनी उद्योगी चतुर, बाल्यावस्था में दुःखी पोछे सुखी तथा तीर्थ ब्रत करने वाळा 1