भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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ग्रह, उनके नाम ओर,गुण-धमं : ४१

राहु केतु तो सूयं और चन्द्र के मार्ग के सम्पात प्रदेश रूप बिम्बहीन है इस कारण जिस समय जिस राशि में या जिस भावेश के साथ रहते हैं, उस राशि या भावेश के बिम्ब के अनुसार शुभ या अशुभ फल देते हँ । राहु केतु ग्रहण के द्वारा सूर्य और चंद्र के पीडक माने जाते हैं इस कारण प्रबल और पाप ग्रह माने जाते ë!

राहु केतु की मेत्री आदि पर विचार

ग्रह भित्र s सम ! राहु बुघ शुक्र शनि | सूर्य चन्द्र मङ्गल | गुरु: जैमिनो आदि का मत बुध शुक्र शनि सूयं चन्द्र गुरु | मङ्गल ' फलदीपि० मत गुरु शुक्र शनि चन्द्र मङ्गल बुघ | ० सर्वा,चि, आदि का मत

राहु के अनुसार ही केतु की मैत्री होना कहा जाता है परन्तु इनमें भी भिन्न

मत हैं ।

ग्रह मित्र शन्नु सम राहु शुक्र शनि सूर्य चन्द्र मंगल | वुध गुरु मतांतर केतु सूर्य चन्द्र मंगल शुक्र शनि बुध गुरु

राहु केतु का स्व-गृह उच्चादि

ग्रह | स्व गृह उच्च |परमोच्च नीच | मूल त्रिकोण राहु | कन्या | मिथुन |मिथुन ६ अंश घन | कुम्भ जैमिनी कन्या | वृष [वृष २० अंश | वृश्चिक | कुम्भ सवं० चिता कुम्भ | बृष [वृष २० अंश | वृश्चिक | मिथुन बृ. पारा० केतु eee मीन । घन |घन ६ अंश मिथुन । सिंह जेमिनी वृश्चिक |वृश्चिक २० अंश | वृष सिंह eee सवं चि० वृश्चिक ञ्चिक २० अंद | वष | घन | बु० पारा

ग्रहों के स्वक्षेत्र उच्च मूल त्रिकोण आदि — ग्रह || दूर्यं | याया wa मंगल | बुध [s गुरु | शुक्र 0. | शनि

राशि | सिह | कक | वृश्चिक क०| घनु मीन | बृष तुला | मकर कु०

Ce मेष | बृष मकर | कन्या = il तुला च्च मे मकर | कन्या | क न T मो १०° 5 २८४४ 00 २७० २०० नीच | तुला | बृश्चिक | कर्क | मीन | मकर | कन्या |. मेष

ला | बुश्‍्चिक | कक | मीन | मकर | कन्या | मेष पमनम | हच | ३०० | २८० | १६० | ५० | २७७ | २७०

ळा मूल त्रिकोण | सिह | मूष | मेष | कत्या | षतु | दुखा | कुम्भ S जि 0 डाम सि मिस विविध समिप LI.