सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें४२ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतोय-फलित खण्ड
क
ग्रहों के स्वगृह उच्च मूल त्रिकोण पर विशेष विचार
च्चन्द्र. |. शुक्र | शनि अह.
किस अंश | १्से
से किस ६०? तक
वृष के. | मेष के | फन्या १से| धनु के | तुला कुर
१ से ३०१ से १२१ १५° तक १ से १०११ गे१५११६ से २०
अंश तक |मूलत्रि० तक उच्च | तक तक | - तक
क्या अधि उपरांत मूल त्रि०|१६से२०१ मूल fo मूल त्रि० | मूल श्रि०
कार है | २१ से | शेष ४से|१३से३०°| "तक |११स३०°|१६से ३० 1२१ से ३० तक स्वक्षेत्र
पह | | इवं ल [= |= [= [se | क कष |= गुर | दुक शुक्र क | पति शनि_
क्षेत्र सिह २१से| ककं पूरा मेष १ से P. न पुरा 2 | मकरपूरा
३०° तक| ' |१०° तक कन्या २१ |घनुके ११ १६|कुम्भके २१
बृश्चिकपुरा मि ३० ३००तकसि३०१तकासे३० तक
उच्च एवं | मेष १००|वृष १ से| मकर [कन्या १५ ककं ५” मीन २७ [तुला २०
परमोच्च | तक |३० तक (२८ तक| तक तक तक तक
अंश मूळ त्रिकोण | सिंह १ से| वृष ४ से| मेष १ से |. कन्था | घनु १ से| तुळा के [कुम्भ १ से
०° तक |३०° तक |१५° तक |१६से२०|१०ˆ तक |१ से १५२० तक तक तक
नीच और | उच्च से ६ राशि अंतर पर नीच होता हैं जिससे परम उच्च बराबर
परम नीच | अंश ही परम नीच में होता है। '>
प्रहों के शुभत्व-और अशुभत्व पर विचार
णुमत्व अशुभत्व दो प्रकार के हैं (१) स्वाभाविक ( नैसगिक ) और
(२) तात्कालिक अर्थात् परिस्थिति वश ।
(१) नैसगिक विशेष शुभ = गुरु, शुक्र
साघारण शुभ या मिश्र ग्रह = चन्द्र, बु
बुध- अकेला या शुम ग्रह युक्त- शुभ ग्रह ह
पाप ग्रह युक्त हो तो-पाप ग्रह है
चन्दरपूर्ण चन्द्र-शुभ ग्रह है
क्षीण चंद्र-पाप ग्रह हे
` श्॒न्द्र का विचार--क्षीण चन्द्र-कृष्ण अष्टमी से शुक्ल ८ तक
- पूर्ण चन्द्र-शुक्ल ८ के पश्चात् कृष्ण ७ तक