सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 66, कुल 418 में से
संदर्भ में पढ़ें५० : ज्योतिष-शिक्षा, तृतोय फलित खण्ड
७ शनि--बात रोग, भयानक ज्वर जैसे टाई फाईड आदि | या भूख से परदेश में मरे ।
क्षुधा तृषाकी पीड़ा से या शत्रु हारा विष या सपं या अग्नि में जलकर ।
८ राहु--कोढ़, विषयुक्त अन्नपान से, विषेले कीड़ों के काटने से या चेचक या इसी
प्रकार के रोग से । :
९ क्ेतु- अस्वाभाविक मृत्यु हो जैसे अपघात आदि जो रिपु विरोध से या कीट के
कारण हो ।
ये अष्टम स्थान के अधिकारी होने या उनके संबन्ध में अपने रोग से मरण
करते हैं |
ग्रहों के स्थान
१ सूयं--शिव मंदिर, खुला स्थान अर्थात् खुली जगह जहाँ प्रकाश है, जल रहित स्थान,
पूर्व दिशा ।
२ चन्द्र-दुगदिबी का स्थान, स्त्रियों के आघोन स्थान, जल औषधि (जड़ी बूंदी आदि)
I जहाँ है वह स्थान, मधु या शराब रखने का स्थान, उत्तर पश्चिम दिशा ।
३ मंगल--चोरों के अड्डे का स्थान, नीच लोगो के आश्रित स्थान, अग्नि का स्थान,
"` युद्ध स्थान, दक्षिण दिशा ।
४ बुंध--विद्वान् पुरुषों की जगह, विष्णु स्थान, सभा स्थान, विहार स्थान, गणक स्थान,
और उत्तर दिशा ।
गुरु--कोष स्थान पीपल वृक्ष, देव ब्राह्मण गृह, उत्तर पूर्व दिशा ।
६ शुक्र वेश्या, शयन स्थान, नृत्य स्थान, स्त्रियों के रहने का स्थान, अवरोध स्थान
वेश्या का. स्थान, दक्षिण पूर्व दिशा ।
७ दनि--नीच श्रेणी के लोगों का स्थान, अपवित्र स्थान, शास्ता (वरुण) देव का मन्दिर
पश्चिम दिशा ।
८ राहुकेतु--वल्मीक (बमीठा), काले छिद्र जिनमें सपं रहते हैं, दक्षिण पढ्चिम दिसा ।
किस ग्रह से क्या प्रकट होता है
१ सूर्य-- शिव का उपासक, भित्रक (वैद्य), राजा यज्ञ आदि कृत्य करने वाला, मंत्री
बाघ, हिरन, चक्रवाक (चकवा) ।
२ चंद्र- शास्ता, देवी का उपासक, स्त्री, रजक, कृषक जल के जीव, खरगोश, हरिन,
चक, (सारस), चकोर |
३ मंगल--रसोइया (रसोई घर में): आयुधः भूत (जिरहवख्तर अस्त्र आदि ले चलने
वाला) सुअर, मेढा, कुक्कुट, श्युंगाल (सियार), गिद्ध, चोर ।
४ बुघ--गोप (गौ चरवाहा), विद्वान्, शिल्पी, गणक (चतुर हिसाबी), विष्णुदास, गरुड़
` ' चातक पक्षी, तोता, बिल्ली ।
५ गुरु-दैवज्ञ (ज्योतिषी) मंत्री, गुरु, विप्र, सन्यासी का नेता, कबूतर, घोड़ा, हंस ।