भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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ग्रह, उनके नाम और गुण-धमं : ५१

६ शुक्र--गाने बजाने वाला, घनो पुरुष, वणिक, नट (नृत्यक), बिट, तंतुवाह (जुलाहा),

वेश्या, मोर, महिष, तोता, गाय ।

७ शनि--तेलो, दास, नीच, शिकारो, लोहा र, हाथी, कोवा, कोयल ।

८ राहु केतु --बौद्ध, सपं पकड़ने वाळा, गधा, मेढा, मेडिया, ऊंट, सपं, अंघक्रार में रहने

वाला स्थान या इसो प्रकार के स्थान मच्छड, खटमल, कीट उल्लू ।

साधारणतः ग्रहों को इस प्रकार बलो समझना

१ सुर्य-स्वगृहो, उच्च राशि, स्वहोराद्रेष्काण में या नवांश में, रविवार, उत्त रायण, दिन

के मध्याह्नं में, रात्रि के आदि में, मित्र के नवांश आदि में और लग्न से दशम

भाव में बलवान्‌ होता हू ।

२ चंव्र--कर्क राशि में, वृष राशि में, अपने दिन, होरा द्रेष्काण नवांश आदि में, राशि

के अन्त में, शुभ ग्रहों से दुष्ट राशि में, चतुर्थ भाव में, दक्षिणायन में बली

होता है । ऋक्ष संधि को छोड़कर प्रत्येक स्थान में पूणं बिम्ब ओर बली, चन्द्र

यदि प्रत्येक ग्रहों से देखा जाता हो तो राजयोग कारक है अर्थात्‌ इस योग में

जन्म हो तो राजा हो । I š

३ संगल-अपने बार में, अपने नवांश द्रेष्काण आदि अपने वर्ग में, मोन, वृचिक, कुम्भ,

मकर और मेष राशि में, रात्रि में, वक्रता पर, दक्षिण दिशा में राशि के आदि

में बली होता है । दशम भाव में ककं में रहने पर सुख देता है ।

४ बुघ--कन्या और मिथुन राशि में, अपने दिन में, अपने वर्ग में, घनुष राशि में रविवार

के अतिरिक्त दिन रात ( सवंदा ) और उत्तरायण में बली होता हैं। यदि

राशि के मध्य का होकर लग्न में हो तो सदा यश और बल देता है ।

५ गुरु---मीन, वृश्चिक, घन, कर्के राशि में, अपने वर्ग ओर अपने बार में, मध्य दिन में,

उत्तरायण में, राशि के मध्य में, कुम्भ राशि में बली होता है, नीच में भी

यदि लर्न, चतुर्थ ओर दशम भाव में हो तो बहुत घन देता है ।

६ शुक्र--उच्च राशि ( मीन ) अपने वर्ग तथा वार में, राशि के मध्य में षष्ठ, द्वादश,

तृतीय और चतुथं स्थान में, अपराह्न में, युद्ध के समय, चन्द्र के साथ रहने

वर वक्री होने पर, यदि सूर्य के आगे रहे तो शुभ होता है ।

७ शनि-तुला, मकर ओर कुम्भ में, सप्तम भाव में, दक्षिणायन में, अपने द्रेष्काण आदि

तथा अपने वार ( शनिवार ) में, राशि के अंत में, संग्राम में बली होता है

यदि कृष्ण पक्ष में वक्री हो तो समस्त राशि में बलवान्‌ होता है ।

८ राहु--मेष, वृष, कुम्भ, कन्या, वृश्चिक ओर कक में, दशम स्थान ñ!

९ केतु--मीन, वृष तथा धनु में, रात्रि में, उत्पात में, केतु उदय में चलो होता है।

ऊपर बताये प्रकार के ग्रह के वल हैं परन्तु भाव फल आदि के प्रभाव से इनमें

अन्तर पड़ जाता है। इस कारण भाव में, योग में, दशा फल में उनके सब फल प्राप्त

नहीं होते ।