सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें५४ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड `
स्वनवांश में हो जब उसकी किरणें दवी हुई हों तो वह अशक्त समझा जाता है ।
स
तारक मारक ग्रह
| मारक ग्रह तारक ग्रह रा सबका [आन र केस जयातु पक नं गर सुक्र वृय के
२ | चन्द्र „ | बुघ, शनि, राहु, केतु » » सूर्यं, मंगल, गुरु, शुक्र
३ | मंगल ,, | शुक्र, शनि, राहु, केतु „ n सूं, चन्द्र, वुध, गुरु
४४| बृष , | चन्द्र, मंगल, गुरु „ n सूर्य, शुक्र, शनि, राहु, केतु
५> गुरु ,, बुध, शुक्र, राहु : , n सूर्य, चन्द्र, do, शनि, केतु
६ | शुक्र ,, | सूर्य, मंगल, गुरु, राहु „ 7 . चन्द्र, बुध, शनि, केतु
७ | शनि ,, | सूर्य, चन्द्र, मंगल | , » वुध, गुरु शुक्र, राहु केतु केतु
ग्रहों के मारक ग्रह
मारक | शनि मंगल | गुरु चन्द्र शुक्र बुध siz
इस प्रकार सब ग्रह एक दूसरे के फल को नष्ट करते है । फल विचारते समय तो
विरोधी बातों का भी विचार करना जैसे शनि अशुभ फलदायी हो और सूर्य शुभ
फलदायी हो तो सूर्य के प्रभाव से शनि का दोष मिट जायगा । इसी प्रकार मारक ग्रह का
विचार करने से ठीक फल मिलता ë 1
अध्याय ४
मैत्री, दृष्टि आदि
शनि से | मंगलसे | गुरुसे | चन्द्र से | शुक्र | बुघसे
नैसगिक मैत्री.