भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

पृष्ठ 89, कुल 418 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 89

मैत्री, दृष्टि आदि : ७३

(११) सूर्य युक्त-बहुत प्रकार से पाप करावे, विद्या धन स्त्री बंधु का नाश, पुत्र से क्लेश,

नेत्रों में रोग हो ।

(१२) अस्तंगत-पाप युक्त ग्रह के समान फल, ग्रह निबंली हो तो बल बहुत कम हो

जाता है ।

(१३) कुचस्तंम-मंगल आदि कुच स्तंभ ३-६-१०-११ राशियों में हो तो उत्तम फलः `

२, ५, ७, ९ राशि में मध्यम फल, १, ४, ८, १२ राशि में कुचस्तंभ हो तो बुरा

फल हो ।

(१४) स्तंभ-उपरोक्त फल ।

(१५) वक्री-शुभ ग्रह वक्री हो और सब ग्रहों में बलवान हो तो राज्य पद सरीक्षा फछ

दे व उस ग्रह की रदिम बहुत हो तो राज्यपद दे ।

पाप ग्रह वक्री हो और सब ग्रहों में बली हो तो दुःख देता है यदि <q बहुत

हो तो पृथ्वी दे ।

(१६) अतिचार-बुरा फल दे, अधिशत्रु की अपेक्षा बुरा फल दे ।

(१७) नीच क्षेत्री-अघिशत्रु सदृश बुरा फल दे ।

(१८) युद्ध में जय-युद्ध में विजयी ग्रह हो तो कुश्ती लड़ाई मुकदमा आदि जीते

पराजय-युद्ध में हारे तो उपरोक्त सब बातें क्षीण हों । ”

शुभग्रह के शुभ उच्च मूल fto स्वक्षेत्री

फळ का प्रमाण पूर्ण १ ३।४ १।२ `

मित्र गृही शत्रु क्षेत्री नीच व अस्तंगत

१।४ १।४ से अल्प का शुभ ०

पाप ग्रह के पाप | अस्तंगत नीच में | शत्रु क्षोत्री मित्र क्षे?

फल का प्रमाण पूर्ण १ ३।४ १।२

स्वश्षेत्री त्रिकोण उच्च या पाप

शड १४सेकम |काफल०

इस प्रकार भाव फल, दशा अष्टकवर्ग गोचर आदि में विचारना ।

२ दिश्बल पूर्ण या मध्यम बली हो तो अपनी योग्यता तथा शक्ति अनुसार फल देता

ë V वह अपनी दिशा में ग्रह की दिशा की ओर से लाकर वस्त्र भूषण, विद्या, यश,

कीति, नाना प्रकार का लाभ, घनघान्य, राज्य, पृथ्वो, वाहन, स्त्री सौख्य, कीति व

सम्पत्ति देता Š । द्रव्य का संग्रह करवाता है ।

यदि वह ग्रह अविशत्रु के घर में हो या पाप ग्रह की दृष्टि हो तो उसका बुरा

फल नहीं होने देता । कभो अच्छा कमी बुरा मिश्रित फल देता है 1

३ काल बली ग्रह-शात्रुओं का नाश करता है, भूमि वाहन की वृद्धि, वीरता सहित,

रत्न और वस्त्र की सम्पदा की प्राप्ति, निर्मल यश, लीलाओं ( खेल कौतुक आदि ) का

विकास करने वाखा सम फल करता हूँ ।