सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 90, कुल 418 में से
संदर्भ में पढ़ें७४ : ज्प्रोतिष-शिक्षा, तुतोय फलित* खण्ड
( १ ) नतोन्नत-बुध,उच्च का हो तो पूर्ण फल देता है नहीं तो योग्यतानुसा र फल देता
है : शेष ग्रहों का जो गणित से नतोन्नत बल आवे उसका जितना कला बल आवे
उसी प्रमाण से व स्थान प्रमाण से फल देता है ।
(२ ) पक्ष घल--जिसका जन्म जिस पक्ष में हो उस पक्ष के प्रत्येक ग्रह का गणित के
अनुसार जो कला बल आवे उसके अनुसार फल 'मिलेगा। शत्रु का नाश एवं
. ` वस्त्र, संतति, स्त्री सुवर्णं भूमि का लाभ पुणं वलो होने पर देते हैं ।
( ३ ) दिन रात त्रिभाग बल--दिन के विभाग में बुध, सूर्य, शनि को क्रमानुसार एवं
रात्रि से विभाग में चंद्र शुक्र मंगळ को क्रमानुसार पूर्ण बल प्राप्त होता है गौर
भुर को दिन, और रात्रि में पूर्ण बल प्राप्त होना बताया ह । ये ग्रह उच्च के हों
तो पूर्ण फल मिलेगा नहीं तो स्थान प्रमाण में फल दे देंगे। पूर्ण बली होने पर
ग्रह पृथिवी, शौर्य, सेवक इनकी वृद्धि करते हूँ ।
(४ ) होरेश, दिनेश, मासेश और नर्षेश का वळ यदि ये स्व या उच्च के हों तो उसकी
प्राप्त कला बल अनुसार फल देते हैं ।
४ चेष्टाघली ग्रह--(१। थोड़ा राज्य, थोड़ी पूजा, थोड़ा घन, थोड़ा यश मिलता
है अर्थात कहीं राज्य कहीं ऐश्वयं कही पूजा ( मदद ) मिलती है।
» यदि ग्रह बलवान् हो तो नाना प्रकार का लाभ व सुख देता है
१, — शुभग्रह वक्री हो सब बलमें बली हो तो राज्य प्राप्ति सरीखा फल
दे । पाप ग्रह वक्री हो तो दु:ख देता है । अपने क्षेत्रके अनुसार योग्यता प्रमाण
पदवो व अधिकार देता है, व्यर्थ फिराता ë 1 चन्द्र का समागम करने वाला
ग्रह चित्त स्वस्थ व सौख्य देता है 1
(२) ग्रह युद्ध में ग्रह बलवान् हो तो युद्ध में जय देता है । बल न हो युद्ध में हार
गया हो तो कैदमे डाले, व्यर्थ फंसे, दगाबाजी का काम करे, मुकदमा हारे ।
(३) राशि में जो बलवान हो वह राज्य व अधिक सोल्य देता है ।
निसर्ग बल
जो ग्रह अधिक बलवान् हो तो ऊपर बताये फल को सिद्धि में सहायक होता ë ।
शुभ ग्रह बली हों-आचार में पवित्र, शुभ और सत्यतायुक्त, सुन्दर रूप, तेजस्वी,
देव-ब्राह्मणों का भक्त कृतज्ञ, उत्तम पुष्प, भूषण वस्त्र युक्त होता है !
क्रूर ग्रह त्ली-लाभी, खोटे कर्म में तत्पर तमोगुणी, मरिन, कृतघ्न, साधुओं का
वैरी, क्रू र स्वभाव, कलह युतत । '
यदि २-३ ग्रह बलवान हों तो पुर्वोक्त शुभाशुभ फलमें उतनी ही अधिकता विचारना 1
६ ऋण घरात्मक दृष्टि बल-दुग्बली ग्रह बुरा फळ देने वाला शुभ ग्रह से दृष्ट
हो तो पुर्ण दृष्ट फल नहीं देता और पाप ग्रह देवता हो तो अच्छे फल को देने वाला ग्रह
भी शुभ फल नहीं देता ।