भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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विश्वनाथ की कुण्डली में योग देखकर लिख दिया था कि विकलांग होगा उसे लकवा मार

गया जिससे Ser हो गया । यह पदपुर के धनीराम लोधी के लड़के की कुण्डली में

लिख दिया था विकलांग होगा । वह लेंगड़ा हो गया । मंगली प्रसाद मास्टर के छड्के

जगन्नाथ प्रसाद श्रीवास को कुण्डली में लिख दिया था संतान नहीं होगी संतान नहीं

हुई । और भी कइयों को जैसा रिख दिया वैसा हुआ । नरसिंहपुर संस्कृत पाठशाळा के

प्रधान अध्यापक पं० श्री नमंदाप्रसाद शास्त्री से श्रीत्र्यम्बक राय: वैद्य: वकील ने अपने घर

से गुमी हुई सोने की साँकल के सम्बन्ध में विचारने का प्रश्न पूछा । शास्त्रीजी ने बताया

कि घर के पश्चिम में जो दार है, उसको सोढ़ी के किनारे पड़ो मिलेगी । वहाँ देखा

तो नहीं मिली ! दुबारा फिर पूउने पर बताया वहाँ रेता मट्टी आदि हटाकर खोजो ।

वैसा क रने से रेत में दबी हुई मिल गई । नरसिंहपुर के श्री चन्द्रभान सर्राफ के यहाँ

बहुत बड़ी चोरी हो गई थी । पंडित जो ने प्रश्‍न कुण्डली पर से विचार कर बताया कि

लगभग ५ मील पदिचम में नदी के किनारे माल गड़ा है ओर ३६ दिन. के भीतर माल

मिल जायगा चोर पकड़ जायगा। लगभग ३०वें दिन पश्चिम में दारुरेवा नदी के

किनारे चोर पकड़ा गया और वहाँ माल गा हुआ मिल गया । चोर लोग मीना जाति

के राजपुताने के रहने वाले थे । '

ऐसी अनेक घटनायें हैं यदि ऐसी घटनाओं का संग्रह किया जाय तो एक बड़ा

पोथा बन जायगा । ऐसे प्रत्यक्ष प्रमाण देखकर ही लोग ज्योतिष विद्या का मान करते

हैं और उसकी ओर आकर्षित होते हैं। इन सर्व बातों से विश्‍वास कर लेना चाहिये

कि भविष्य फल अवश्य जाना जा सकता है। इसके विषय में शंका करना व्यर्थ दै ।

पाठक स्वतः जब अनेक कुंडलियों का अध्ययन करेंगे तो उनके प्रत्यक्ष फल देखकर इसमें

विश्वास अवश्य बढ़ेगा और ज्यो तिष शास्त्र के अध्ययन में आनन्द आयेगा और रुचि

बढ़ेगी । ज्योतिष शास्त्र के वैज्ञानिक रूप से अध्ययन की अत्यन्त आवद्यकता है। |

अध्ययन के निमित्त यहाँ एक प्रकार के विषय के योगों को एकत्र कर दिया है

जिससे वैसे मनुष्यों की कुण्डलियों में उन योगो के अध्ययन में सहायता मिले । विषय￾वार फल देने से कहीं-कहीं विषय बदलने से उस फल की पुनरावृत्ति हो गईहै।

ज्योषित शास्त्र में भी अनेक मतांतर हैं. कहीं उन मतांतरों को भी अध्ययन के

निमित्त दे गया दिया है । जिसका अध्ययन कर पाठक लाभ उठायेंगे । ज्योतिष के

योगो में कई ऐसे योग दिये हैं जो आजकल होना असम्भव है परन्तु अध्ययन हिताथं

उन्हें भी दे दिया है 1

इस पुस्तक के लिखने में या कापी करने में या छापने में अशुद्धियाँ हो जाना

सम्भव है । प्राथना है कि कोई अशुद्धियाँ या भूल जो दृष्टिगोचर हो कृपा कर सुधार

कर लेखक को सूचित करने का कष्ट करेंगे तो मैं बड़ा अनुगृहीत होऊँगा । मूल हो जाना

मानवीय है, पाठक इसके लिए क्षमा करेंगे । ज्योतिष शास्त्र $ फलित ज्ञान का विस्तार

करने के निमित्त यह पुस्तक लिखी गई है 1 जिससे फलित के अध्ययन करने में सहायता